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    नागपुर. मनपा में गत 15 वर्षों से भाजपा की सत्ता है. इन कार्यकालों में प्रत्येक वर्ष स्थायी समिति की ओर से बजट पेश कर लोकलुभावनी योजनाएं देने का वादा किया गया. लेकिन योजनाएं तो दूर लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पाई है. यहीं कारण है कि अभी से लोगों में रोष दिखाई दे रहा है. जिससे पार्षदों के लिए निकट भविष्य में आ रहा मनपा का आम चुनाव आसान नहीं होने का संदेह जताया जा रहा है. जानकारों के अनुसार शहर में विकास भले ही दिखाई दे रहा हों, लेकिन इसका श्रेय राज्य और केंद्र सरकार को है. जहां 15 वर्षों में समय-समय पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की सत्ता रही है. लेकिन मनपा की ओर से नगण्य विकास हो पाया है. इसके अलावा जनता को सर्वप्रथम अपने क्षेत्र में सड़क, पानी और बिजली की आवश्यकता होती है. इन मूलभूत मुद्दों पर भी मनपा खरी नहीं उतर पाई है. जिससे अब धीरे-धीरे लोगों का गुस्सा फूटता दिखाई दे रहा है.

    लोगों से टूट गया सम्पर्क

    सूत्रों के अनुसार प्रभाग में विकास नहीं कर पाने के कारण पार्षद क्षेत्र की जनता का सामना नहीं कर पा रहे हैं. लंबे समय से मतदाताओं से दूरियां होने के कारण पूरी तरह सम्पर्क टूट गया है. अब मनपा का वर्ष 2022 की शुरुआत में ही चुनाव होगा. अत: पार्षदों के पास केवल 6 माह का समय बचा हुआ है. ऐसे में अब मतदाताओं के समक्ष जाने की जटिल समस्या पार्षदों के समक्ष है. इसी बीच कोरोना की तीसरी लहर आने की भी संभावना जताई जा रही है. दूसरी लहर में लोगों ने काफी मुसीबतें झेली है. चूंकि कोरोना से निपटने की पूरी जिम्मेदारी मनपा पर है और दूसरी लहर में समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने से भी लोगों का मनपा पर गुस्सा दिखाई दे रहा है. कुछ प्रभागों में तो 4 वर्षों में कभी पार्षद दिखाई ही नहीं दिया है. कुछ प्रभागों में केवल 1 या 2 पार्षद सक्रिय है. वे भी अपने परिसर के अलावा दूसरी जगह जाने से कतरा रहे हैं. 

    सोशल मीडिया करेगा नाक में दम

    जानकारों के अनुसार भले ही विपक्षी दल मनपा चुनाव के दौरान प्रचार में सत्तापक्ष के सामने कमजोर पड़े लेकिन इस चुनाव में सोशल मीडिया के कारण पार्षदों के नाक में दम होने की संभावना जताई जा रही है. इसके उदाहरण अभी से देखे जा रहे है. कई पार्षदों के खिलाफ तरह-तरह के पोस्ट ग्रुप में देखे जा रहे हैं. अधूरे विकास कार्यों को टैग कर लोग अभी से पार्षदों से सवाल पूछ रहे है. सूत्रों के अनुसार हाल ही में एक पार्षद के नाम पर रंग लगाए जाने की पोस्ट फेसबुक पर डाली गई.