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  • निधि में कटौती, उखड़ा सत्तापक्ष

नागपुर. मनपा के स्थायी समिति सभापति पिंटू झलके द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 में विकास कार्यों के लिए भले ही 2,731 करोड़ का बजट पेश किया गया हो, लेकिन वर्तमान में केवल 1,700 करोड़ की आय होने तथा मनपा पर 2,394 करोड़ का बकाया होने के कारण मनपा आयुक्त राधाकृष्णन.बी ने फिलहाल कुछ विकास कार्यों के लिए निधि को मंजूरी प्रदान की. 63.75 करोड़ की निधि मंजूर किए जाने को अब शहर के साथ अन्याय करार देते हुए सत्तापक्ष के पार्षदों की ओर से कड़ी आपत्ति जताई जा रही है. यदि इस तरह से पार्षदों को परेशान करना हो, तो मनपा को पूरी तरह बर्खास्त ही क्यों न किया जाए. इस तरह का आक्रोश भी जताया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि स्थायी समिति सभापति की ओर से पेश किए गए बजट में 1,411 करोड़ राज्य सरकार से अनुदान के रूप में प्राप्त होने की आशा जताई गई है.

पार्षदों को मिलेंगे 30 लाख : झलके

स्थायी समिति सभापति पिंटू झलके ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह से विकास कार्यों की निधि में कटौती करने से विकास को अंजाम नहीं दिया जा सकेगा. चुनाव का वर्ष होने से जनता को पार्षदों से काफी आशा रहती है. किंतु जिस तरह से निधि को मंजूरी दी गई, उसके अनुसार प्रत्येक पार्षद को प्रभाग में कार्य के लिए 30 लाख का निधि मिलने की ही आशा है. उन्होंने कहा कि फिक्स प्रायरिटी में 14 लाख, वार्ड निधि में 10 लाख और झोनल बजट से निधि को मिलाकर उक्त निधि मिल पाएगी. उन्होंने कहा कि आयुक्त के समक्ष नाराजगी जताई थी. जिस पर उन्होंने विकास कार्यों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने का आश्वासन दिया है. जिसके बाद आगे की पहल करने की जानकारी दी है.

सामने आकर करें ‘वार’ : जोशी

पूर्व महापौर संदीप जोशी ने कहा कि कोरोना का हवाला देकर पूरे वर्ष भर महापौर निधि को रोककर रखा गया है. यहां तक कि सुलभ शौचालय के लिए 75 प्रतिशत निधि रखी गई, किंतु इसमें भी कटौती कर दी गई है. मनपा आयुक्त के पीछे इस तरह से कौन परेशान कर रहा, इसका सभी को अंदाजा है. किंतु किसी के कंधे पर बंदूक रखकर हमला करने से बेहतर सामने आकर ‘वार’ करने की चुनौती भी उन्होंने दी. उन्होंने कहा कि मनपा कर्मचारियों को 7वां वेतन आयोग देकर 110 करोड़ खर्च करने के लिए निधि है. लेकिन पार्षदों को देने के लिए निधि नहीं है राज्य की सभी मनपा में विकास हो रहा है. केवल नागपुर महानगर पालिका में विकास कार्य खंडित है.

उजागर हो वास्तविकता : गुडधे

वरिष्ठ पार्षद प्रफुल्ल गुडधे ने कहा कि मनपा की जो आर्थिक स्थिति है, उसी के आधार पर मनपा आयुक्त ने विकास कार्यों के लिए निधि को मंजूरी प्रदान की है. मनपा में भाजपा के लगभग 15 वर्षों के कार्यकाल में मनपा की जो तिजोरी खाली हुई है. उसी आधार पर आयुक्त ने निधि को उजागर किया है. जनता को भी वास्तविकता का पता चलना चाहिए. उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय में भाजपा ने मनपा के लिए आय के नए स्रोत तैयार ही नहीं किए, बल्कि हर वर्ष अनाप-शनाप बजट पेश कर, केवल आय से अधिक का खर्च किया है. जिससे मनपा पर भुगतान का बोझ बढ़ा हुआ है. इन्होंने जो आय-व्यय का मार्ग दिखाया है, उसी दिशा में मनपा आयुक्त चल रहे हैं. 

अधिकारों पर अतिक्रमण : भोयर

वरिष्ठ पार्षद रवीन्द्र भोयर ने कहा कि जीएसटी, सम्पत्ति कर और विज्ञापन, पानी कर जैसे मनपा के मुख्य आय के स्रोत है. इससे होनेवाली आय के आधार पर ही खर्च का आंकलन किया जाता है. मनपा के कर्मचारियों को 7वां वेतन आयोग देने का कुछ ही दिनों पहले आयुक्त ने निर्णय कर लिया. जिस पर लगभग 150 करोड़ का खर्च होगा. लेकिन इसके विपरीत विकास के कामों पर कटौती की जा रही है. मनपा आयुक्त का काम केवल बजट को कार्यान्वित करना है, किंतु बजट के कामों में कटौती कर जनता द्वारा चुने गए पार्षदों के अधिकारों पर एक तरह से अतिक्रमण किया जा रहा है. यह स्थानीय स्वराज्य संस्था में निर्धारित पूरी व्यवस्था का अपमान होने का रोष भी उन्होंने जताया. उन्होंने कहा कि विकास के लिए निधि कहां से आएगी. मनपा तय करेगी, किंतु इस तरह से निधि में कटौती नहीं की जानी चाहिए थी.

बदले की चल रही राजनीति : कुकडे

परिवहन विभाग के पूर्व सभापति बंटी कुकडे ने कहा कि मनपा में निकट भविष्य में होनेवाले आम चुनावों को देखते हुए बदले की राजनीति का षडयंत्र चल रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने शहर विकास को जो गति प्रदान की थी. उसमें बाधा उत्पन्न करने का प्रयास हो रहा है. जिस समय मनपा को जीएसटी के रूप में 50 करोड़ की आय होती थी, उस समय भी विकास कार्य को निधि मिलती थी. अब वर्तमान में प्रतिमाह राज्य सरकार की ओर से 100 करोड़ मिल रही है, फिर भी निधि में कटौती की जा रही है. नागपुर पर मुंबई से अन्याय किए जाने का आरोप भी उन्होंने लगाया. 

अब समझ में आ रही परेशानी : सहारे

पूर्व विपक्ष नेता एवं वरिष्ठ पार्षद संदीप सहारे ने कहा कि विकास के लिए निधि नहीं मिलने से क्या परेशानी होती है. अब सत्तापक्ष को समझ में आ रहा है. हालांकि मनपा की आर्थिक कंगाली के चलते ही निधि नहीं मिल रही है. किंतु जिस समय मनपा की आर्थिक स्थिति अच्छी थी, उस समय भी सत्तापक्ष भाजपा की ओर से कांग्रेस के पार्षदों को विकास निधि नहीं दी गई. सदन में आवाज लगाई, किंतु उसे नजरअंदाज किया गया. पूरे 15 वर्षों के कार्यकाल में भाजपा ने अपने पार्षदों को कितनी निधि दी और कांग्रेस के पार्षदों को कितनी दी. इसके आंकड़े उजागर करने की मांग भी उन्होंने की. उन्होंने कहा कि 15 वर्षों के कार्यकाल में भाजपा ने मनपा की न केवल पूरी तिजोरी खाली कर रखी है, बल्कि मनपा पर 2,400 करोड़ का आर्थिक बोझ भी बढ़ा दिया है. जिसका भुगतान भविष्य में जनता को अपनी जेब से करना पड़ेगा.