Corona Updates : 700 new cases of corona in Tripura, total number of infected increased to 56,169
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    नागपुर. स्टाफ नर्स अर्चना का 12 वर्षीय बेटा कोरोना से संक्रमित हुआ. बेटे को होम आइसोलेशन में रखकर उसका इलाज शुरू किया. 1-2 को दिन की छुट्टी के बाद उन्होंने मेडिकल में अपनी सेवा जारी रखी. हालांकि मां की ममता ड्यूटी पर जाने को नहीं कर रही थी लेकिन मरीजों का इलाज भी जरूरी था. वहीं डॉ. जुगल अब तक 2 बार पॉजिटिव हो चुके हैं. इलाज कराने के बाद फिर से ड्यूटी पर लौट आए.

    वहीं कुछ नर्स और निवासी डॉक्टर तो अब तक 3-3 बार पॉजिटिव हो चुके हैं लेकिन कुछ दिनों के इलाज और आराम के बाद अपने-अपने काम पर लौट चुके हैं. मार्च-अप्रैल में एक ओर जहां सबसे अधिक मरीज मेडिकल में भर्ती हो रहे थे वहीं स्टाफ, नर्स और डॉक्टर भी लगातार पॉजिटिव हो रहे थे. इसके बावजूद काम प्रभावित नहीं हुआ. कोरोना ने परेशान तो जरूर किया पर फ्रंट लाइन वर्कर्स की हिम्मत नहीं तोड़ सका. 

    कोरोना मरीज बढ़ने की वजह से अप्रैल में ही मेडिकल में 1,000 बेड की व्यवस्था कर ली गई थी. वहीं अधिष्ठाता डॉ. सुधीर गुप्ता की अगुवाई में डॉक्टरों सहित नर्सों की ड्यूटी लगाई गई. इस मुश्किल समय में निवासी डॉक्टरों के साथ ही इंटर्न ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. स्थिति यह थी कि हर दिन कोई न कोई डॉक्टर, नर्स और स्टाफ पॉजिटिव आ रहा था.

    कई विभाग प्रमुख और वरिष्ठ डॉक्टरों को तो आईसीयू तक में भर्ती करना पड़ा. लेकिन जैसे ही तबीयत सुधरी, सभी अपने-अपने काम पर लौट आए. कोरोना ने सभी को परेशान किया लेकिन डॉक्टर और नर्सों की हिम्मत नहीं तोड़ सका. 

    12 घंटे की ड्यूटी, गर्मी में PPE किट 

    कोरोना काल में सभी ने 12 घंटे की ड्यूटी की. भीषण गर्मी के बावजूद पीपीई किट में डॉक्टर और नर्सों ने सेवाएं दीं. मरीजों के सतत संपर्क में रहने का ही नतीजा था कि वे संक्रमित हो गये. मेडिकल स्टाफ के लिए पेइंग वार्ड में व्यवस्था की गई थी. वहीं गंभीर होने पर आईसीयू में भर्ती कराया जाता था. हालांकि अब भी कई डॉक्टर और नर्स पॉजिटिव हैं लेकिन संख्या कम होने लगी है. कुछ नर्सें ने तो परिजनों के पॉजिटिव होने के बाद भी अपनी सेवा को जारी रखा. परिजनों के औषधोपचार के साथ ही मेडिकल में मरीजों के औषधोपचार की दोहरी जिम्मेदारी संभालते हुए कोरोना संकट का सामना किया. 

    अब भी अलर्ट पर : डॉ. गुप्ता

    मेडिकल की समूची व्यवस्था संभालने वाले अधिष्ठाता डॉ. सुधीर गुप्ता मानते हैं कि हालांकि कोरोना के मरीजों की संख्या कम हुई है लेकिन अब भी मेडिकल अलर्ट पर है. मरीजों को बेहतरीन सेवा देने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है. कोरोना के कम होने के बाद ब्लैक फंगस के मरीज बढ़ रहे हैं. उनका भी योग्य तरीके से इलाज चल रहा है. इतना ही नहीं, तीसरी लहर की संभावना के मद्देनजर तमाम इंतजाम किये जा रहे हैं. 

    व्यवस्था संभालते हुए हो गए पॉजिटिव 

    मेडिकल के वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. अविनाश गावंडे भी व्यवस्था संभालते हुए कोरोना की चपेट में आ गये लेकिन औषधोपचार के बाद फिर से काम पर लौट आए. डॉ. गावंडे मानते हैं कि भले ही कोरोना का प्रकोप कम हुआ हो लेकिन अब भी सावधानी और सतर्कता बरतना आवश्यक है. लापरवाही फिर किसी मुसीबत में डाल सकती है. 

    2 बार हुए संक्रमित

    पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के निवासी चिकित्सक डॉ. जुगल पिपरेवार और डॉ. राजेश दलाल मरीजों का इलाज करते हुए एक नहीं बल्कि 2 बार पॉजिटिव हो गये. संक्रमित होने की वजह से परिवार की चिंता बढ़ गई. इस बीच इनके परिवार के भी कुछ सदस्य संक्रमित हो गये थे. डॉक्टर बताते हैं कि अप्रैल-मई का दौर बेहद खतरनाक था. लेकिन जैसे ही कोरोना से ठीक हुए पुन: काम पर जुट गये. कैजुवल्टी, ओपीडी सहित कोरोना वार्ड में ड्यूटी जारी है.