Nagpur High Court

    नागपुर. किसानों के नाम पर फर्जी खातें खोलकर कर्ज का वितरण करने को लेकर यूको बैंक में हुए कथित घोटाले के मामले पर हाई कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेकर इसे जनहित में स्वीकार किया था. याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने आरबीआई की ओर से की जा रही कार्यवाही की जानकारी मांगी. जिस पर अदालत द्वारा दिए गए आदेशों के अनुसार चल रही कार्यवाही पर विस्तृत हलफनामा देने के लिए आरबीआई की ओर से समय देने का अनुरोध किया गया. जिसके बाद याचिका 4 सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी. सुनवाई के दौरान आरबीआई की ओर से पैरवी कर रहे वकील का मानना था कि ऐसे मामलों में जांच अधिकारी की ओर से किस तरह की जांच करना अनिवार्य है. इसकी जानकारी लेनी पड़ेगी. जबकि इस तरह की गतिविधि अन्य राष्ट्रीयकृत बैंको में भी उजागर हुई है.

    25 करोड़ की धांधली

    आदिलाबाद स्थित मेसर्स जी.एस. आईल लि. कम्पनी के कर्मचारियों को कृषि कर्ज देने के नाम पर यूको बैंक की वर्धा और हिंगनघाट शाखा से 25 करोड़ का वितरण किया गया था. लेकिन कर्ज उठानेवाले फर्जी किसान होने का मामला उजागर हुआ. जिससे तत्कालीन व्यवस्थापक शंकर जयराम खापेकर और हंसदास मेश्राम के खिलाफ मामले दर्ज किए गए. मामला उजागर होने के बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई. मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों की ओर से गिरफ्तारी पूर्व जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. लेकिन अदालत ने इस संदर्भ में स्वयं संज्ञान लेकर याचिका के रूप में स्वीकृत कर लिया. 

    CBI की नई स्पेशल जांच टीम

    सीबीआई की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत को बताया था कि नई स्पेशल जांच टीम गठित की गई. मामला लंबित रहते दौरान स्पेशल टीम ने यूको बैंक के 7 बैंक अधिकारियों के खिलाफ सबूत जमा किए हैं. जिसके आधार पर प्राथमिक दस्तावेज भी प्राप्त किए गए. इसी आधार पर सीबीआई अब सप्लीमेंट्री चार्जशिट दायर करने की मंशा बना रही है. वर्धा के मुख्य न्याय दंडाधिकारी के समक्ष संभवत: चार्जशिट दायर की जाएगी. अदालत मित्र का मानना था कि आरबीआई की ओर से समय-समय पर कई बार दिशानिर्देश जारी किए गए हैं. लेकिन इन दिशानिर्देशों का उल्लंघन होने पर क्या कार्रवाई प्रस्तावित की गई. इसकी जानकारी आरबीआई की ओर से उजागर नहीं हो रही है. यूको बैंक अधिकारियों की ओर से वर्धा और हिंगनघाट ब्रांच में आरबीआई के निर्देशों को ताक पर रखा गया.