पाकिस्तान की यही औकात, चीन को करता गधों का निर्यात

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, पाकिस्तान गधों की बदौलत चल रहा है. वहां के विपक्ष ने प्रधानमंत्री इमरान खान को गधों का राजा मान लिया है. बजट के दिन वहां की संसद इस नारे से गूंज उठी- डंकी राजा की सरकार, नहीं चलेगी, नहीं चलेगी!’’ हमने कहा, ‘‘पाकिस्तान की पॉलिटिक्स में गधा कहां से आ गया? क्या पाकिस्तान की राजनीति से समझदार लोग गधे के सिर से सींग की तरह गायब हो गए हैं?’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, पाक की इकोनॉमी पूरी तरह गधों के भरोसे है. 2019 में चीन ने पाकिस्तान को 42 अरब डॉलर का कर्ज मंजूर किया था, बदले में पाकिस्तान ने वादा किया कि वह चीन को गधों की भरपूर सप्लाई करेगा. पाक ने चीन को 3 वर्षों में 80,000 गधे एक्सपोर्ट करने का वादा किया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गधों की तीसरी बड़ी आबादी पाकिस्तान में है.’’ 

    हमने कहा, ‘‘चीन इतने गधों का करता क्या है? क्या ईंट, रेत, गिट्टी या मलबा ढोने के लिए इस जानवर का इस्तेमाल करता है या फिर चीन के धोबियों को कपड़ों की गठरी लादने के लिए गधे की आवश्यकता पड़ती है? एक कहावत भी है कि धोबी का वश ग्राहक पर न चले तो गधे के कान मरोड़े!’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, चीनी लोग गधों को मारकर उसकी खाल से जिलेटिन हासिल करते हैं. वे मानते हैं कि ‘इझाऊ’ नामक इस जिलेटिन के सेवन से ताकत आती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. यह जिलेटिन 1500 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिकता है. जिलेटिन हासिल करने के लिए चीन ने 2017 में 40 लाख गधे कत्ल किए. चीन की कंपनियों ने गधों की पैदाइश (डंकी फार्मिंग) के लिए 3 अरब डॉलर का निवेश किया है.’’ 

    हमने कहा, ‘‘गधे जैसे सीधे-सादे प्राणी के साथ ऐसा जुल्म नहीं करना चाहिए. गधा बोझ ढोने के काम आता है और कहते हैं कि गधी का दूध पिलाने से दुबले बच्चे मोटे-ताजे हो जाते हैं. मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा अपनी सुंदरता कायम रखने के लिए गधी के दूध से स्नान करती थीं.’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, अपनी हिंदी वर्णमाला में पहले गणेश का ‘ग’ था लेकिन फिर गधे का ‘ग’ कर दिया गया क्योंकि गधा सेक्यूलर होता है. व्यंग्य कवि मधुप पांडेय ने लिखा है- वे इतने विद्वान हैं कि घोड़ा शब्द के एक हजार अर्थ बताते हैं लेकिन जब भी बाजार जाते हैं, घोड़े की बजाय गधा खरीद लाते हैं.’’