रांची प्रेस क्लब बना लुट का जरिया, मरीजों के नाम पर हो चुकी लाखों की उगाही, मरीज हैं नदारत

    ओमप्रकाश मिश्र 

    रांची. कोरोना मरीजों (Corona Patients) की जान बचाने के लिए रांची प्रेस क्लब (Ranchi Press Club) में खोले गए अस्थायी अस्पताल (Temporary Hospital) लूट का अड्डा बन गया है। मरीजों के नाम पर सरकार और समाजसेवी संस्थाओ से लाखों रूपये उगाही की जा रही है। आपदा को अवसर बनाकर मरीजों के नाम पर धन उगाही तो की जा रही है, पर यहाँ मरीज नदारत हैं। बेड खाली पड़े हैं चिकित्सीय उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। डॉक्टर और नर्स भी नहीं है पर मरीजों के नाम पर लाखों रूपये मदद के रूप में समाजसेवी संस्थानों से मांगी जा रही है। 

    कोरोना मरीजों की जान बचाने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तत्परता दिखाते हुए जहाँ जगह मिली वहीँ कोरेनटाइन सेंटर या अंशकालीन अस्थाई अस्पताल खोल दिया। इन अस्पतालों की देख रेख के लिए उपायुक्त के साथ कई सहकर्मियों को भी नियुक्त किया पर निगरानी के नाम जहाँ सिर्फ खाना पूर्ति की गई, वही इस तरह के अस्पतालों में मरीजों की आड़ पर आपदा को अवसर बनाकर जमकर लुटने का काम किया जा रहा है, जो बदस्तूर जारी है। इस बात को सत्यापित कर रहा है रांची प्रेस क्लब में खोला गया बिरसा मुन्डा मेडिकेयर नामक अस्पताल।

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने इस अस्पताल का विधिवत उद्घाटन किया था। उदेश्य था रज्य भर में बेड की कमी को पूरा कर यतायत संख्या में मर रहे मरीजों को बचाना। इसके लिए सरकार और समज सेवी संस्थाओं द्वारा ऑक्सीजन सिलेंडर, दवाइयां, मेडिकल उपकरण और पैसे की मदद भी पहुंचायी जा रही है। रांची प्रेस क्लब में खोले गए अस्थाई अस्पताल का आलम यह है की यहाँ न तो मरीज हैं न डॉक्टर न नर्स और न ही मेडिकल उपकरण, इस अस्पताल में जाँच और मरीजों की जान बचाने के नाम पर सिर्फ एक ईसीजी मशीन, ऑक्सीजन के 10 सिलेंडर और खाली पड़े बेड है पर मरीजों के नाम पर लाखों रूपए की उगाही की जा रही है।

    …तो जांच करा कर दोषी लोगों के खिलाफ सख्त क़ानूनी कार्रवाई करायी जाएगी

    रांची प्रेस क्लब में इस अस्पताल को बनाने  की जिम्मेदारी मिशन ब्लू फाउन्डेशन को दी गयी थी। इसी फाउन्डेशन के नाम पर उगाही का काम किया जा रहा है। राजधानी के एक बड़े धार्मिक संसथान से मरीजों की देखभाल करने और अस्पताल को संचालित करने के लिए चार लाख रूपये मांगी गई, पर अस्पताल की व्यवस्था  देखकर संसथान ने महज दो लाख रूपये का अनुदान दिया, जबकि योगदा सत्संग मठ से दो लाख रूपये लिए गए। दो लाख रुपये लेने की बात स्वीकार करते हुए मिशन ब्लू फाउंडेशन के प्रमुख पदाधिकारी पंकज सोनी ने कहा कि इस अस्पताल को मिशन ब्लू फाउन्डेशन और कमलभद्र फैसिलिटीज के संयुक्त सहयोग से चलाया जा रहा है, पर जहाँ तक रही धन उगाही की बात तो इसमें सिर्फ अस्पताल संचालकों की संलिप्तता नहीं है। बल्कि प्रेस क्लब वाले भी धन उगाही  के काम को अंजाम दे रहे है। सोनी ने बताया कि प्रेस क्लब की ओर से एक विधायक से पांच लाख रूपये, एक ठेकेदार से दो लाख, और एक समाज सेवी संसथान से पच्चास हजार रूपये लिए हैं। प्रेस क्लब के सचिव अखिलेश सिंह से इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि प्रेस क्लब में हॉस्पिटल बनाने के लिए मिशन ब्लू फाउन्डेशन को अधिकृत किया गया था अगर हॉस्पिटल के नाम पर कहीं से भी धन उगाहीं की गयी है तो जाँच करा कर दोषी लोगों के खिलाफ सख्त क़ानूनी कार्रवाई करायी जाएगी ।