Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation

  • 4 साल में बड़ा पद न मिलने से नाराजगी

पिंपरी. चार साल पहले पिंपरी-चिंचवड़ मनपा की सत्ता पाने वाली भाजपा ने 5 वर्षों में सभी को पद देने की घोषणा की थी। चार साल तो बीत गए, लेकिन 27 नगरसेवकों को प्रभाग अध्यक्ष या विषय समिति अध्यक्ष जैसा कोई भी बड़ा पद नहीं मिला। इसी वजह से इन नगरसेवकों में नाराजगी व बेचैनी नजर आ रही है।

सभी प्रभाग भाजपा ने अपने अधीन रखे

पिंपरी-चिंचवड़ मनपा के वर्ष 2017 के चुनावों में भाजपा के 76 नगरसेवक चुने गए और उसे स्पष्ट बहुमत मिला। पांच निर्दलीय नगरसेवकों ने भी भाजपा को समर्थन दिया। पिंपरी मनपा में पहली बार भाजपा की सत्ता आई। विधायक लक्ष्मण जगताप और महेश लांडगे ने शहर की कमान संभाली। मनपा का कोई भी पद विपक्षियों को न मिलने देने के लिए बंदोबस्त किया। इसी नजरिए से प्रभाग की रचना भी की गई और सभी प्रभाग भाजपा ने अपने अधीन रखे। पार्टी ने 5 वर्षों में सभी नगरसेवकों को एक पद देने का निर्णय लिया था। पहले ढाई साल में नितिन कालजे और राहुल जाधव को महापौर बनने का मौका दिया गया, जबकि शैलजा मोरे और सचिन चिंचवड़े को उप-महापौर पद सौंपा गया।

सीमा सावले को महत्वपूर्ण स्थायी समिति अध्यक्ष का पद दिया गया। उसी समय हर सदस्य को स्थायी समिति में मौका देने का वायदा कर एक साल पूरा होने के बाद इस समिति के सभी सदस्यों के इस्तीफे लिए गए, लेकिन दूसरे ही साल इसमें बदलाव किया गया।

अगला चुनाव फरवरी 2022 में 

स्थायी समिति में एक साल पूरा होने के बाद विलास मडिगेरी को अध्यक्ष पद मिला। ममता गायकवाड़ भी अध्यक्ष बनीं और वर्तमान में संतोष लोंढे अध्यक्ष हैं। अगला मनपा चुनाव फरवरी 2022 में होने की उम्मीद है और उसके अनुसार चुनाव के लिए र्सिफ 13 महीने बचे हैं। चार साल में भाजपा के 27 नगरसेवकों को एक भी पद नहीं मिला। विषय समिति अध्यक्ष और प्रभाग अध्यक्ष का पद भी नहीं मिला।

विषय समितियों के अध्यक्ष का चयन पिछले महीने ही हुआ है और उनका कार्यकाल एक साल का होता है। अगले साल ऐन चुनाव से पहले अध्यक्षों के चुनाव होने की संभावना कम है। इस वजह से नगरसेवकों को अध्यक्ष का पद मिलने की संभावना कम ही है। अब चिंचवड़ निर्वाचन क्षेत्र से उषा ढोरे महापौर हैं तथा पिंपरी के केशव घोलवे डिप्टी मेयर हैं। गत दिनों महापौर बदलने की चर्चा हो रही थी, लेकिन इस चर्चा पर भी अब विराम लग गया।