आघाड़ी सरकार के खिलाफ भाजपा का आंदोलन

  • कृषि बिल पर राज्य सरकार ने लगाई रोक

पुणे. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए 3 कृषि बिलों का मसौदा तैयार किया है ताकि वे अपनी इच्छानुसार बेचने की स्वतंत्रता दे सकें. विपक्षी दल इस बिल का विरोध कर रहे हैं. राज्य में महाविकास आघाडी सरकार ने कैबिनेट बैठक में इस बिल को स्थगित कर दिया है. इसके विरोध में पुणे जिला भाजपा की ओर से जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर, आघाडी सरकार के फैसले की प्रतियां जलाकर कड़ी निंदा की गई.

राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी

इस आंदोलन में पूर्व मंत्री बाला भेगडे, भाजपा के पुणे जिला अध्यक्ष गणेश भेगडे, जालिंदर कामठे, धर्मेंद्र खांडरे आदि नेताओं समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी थी. इस दौरान राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई.

मोदी को श्रेय की वजह से विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 2 बिलों के माध्यम से कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव का मार्ग प्रशस्त किया है. केंद्र सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है. इस निर्णय के लिए, जो कृषि प्रधान देश में किसानों के जीवन की दिशा और दशा में एक सकारात्मक बदलाव लाएगा, प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को धन्यवाद देना बहुत कम है.भाजपा ने किसानों के लिए एक खुला बाजार बनाने के लिए घोषणा पत्र में वादा किया था.इ न विधेयकों का श्रेय मोदी सरकार को जाएगा, इसलिए कांग्रेस और उसके सहयोगी बिल का विरोध कर रहे हैं.

15 दिनों में रोक हटाए सरकार

पूर्व मंत्री संजय उर्फ बाला भैगड़े ने चेतावनी दी कि अगर महाविकास आघाड़ी सरकार अगले एक पखवाड़े में कृषि विधेयक पर रोक नहीं हटाती है, तो भारतीय जनता पार्टी जिले के चौराहे पर रास्ता रोको आंदोलन का मंचन करेगी. मोदी सरकार का उद्देश्य किसानों द्वारा उत्पादित कृषि उपज को उचित मूल्य देना और उनकी आय में वृद्धि करके किसानों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना है.इसके लिए, प्रधानमंत्री मोदी, भारत सरकार, कृषि मंत्रालय और कृषिविदों के कुशल नेतृत्व में, किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निर्धारित किया है.मगर इस थ्री व्हीलर सरकार ने इस बिल का विरोध किया है और किया है कि वह किसानों के खिलाफ हैं. हम महाविकास आघाडी सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले की निंदा करते हैं, यह राय पुणे जिला अध्यक्ष गणेश भेडे ने व्यक्त की.