कोरोना उपचार का मामला: अमीरों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलेगी सहूलियत!

– सिर्फ शहरी गरीबों के लिए ही सुविधा उपलब्ध

पुणे. शहर में कोरोना संक्रमितों की तादाद बढ़ती जा रही है. हाल ही में 13 हजार से अधिक लोग संक्रमित मिल चुके हैं. मनपा ने अपने 74 अस्पतालों में कोरोना उपचार की सुविधा मुफ्त में कराई हैं.

साथ ही 10 निजी अस्पतालों के साथ भी करार किया है, लेकिन आगामी काल में इन निजी अस्पतालों में सिर्फ शहरी गरीबों को सहूलियत में सुविधा दी जाएगी. शेष सभी लोगों को अपने जेब से पैसे देने होंगे. हाल ही में महापालिका द्वारा यह निर्णय लागू किया गया है.

शहरी गरीबों को दी जाती है सहूलियत

ज्ञात हो कि कैंसर, डायबिटीज जैसी घातक बीमारियों के इलाज काफी महंगे होते जा रहे हैं. जो शहर के गरीबों के बस की बात नहीं होती. जिसके कारण गरीब मरीजों को अपनी जान तक भी गंवानी पड़ी है. इसको ध्यान में रखते हुए मनपा की ओर से अप्रैल 2010 से शहरी-गरीबों के स्वास्थ्य के लिए परियोजना शुरू की गयी थी. पूर्व स्थायी समिति अध्यक्ष निलेश निकम ने यह योजना शुरू करने में अग्रणी भूमिका ली थी. इस योजना के तहत जिन लोगों की वार्षिक आय 1 लाख से कम होगी, उन्हें इस योजना का लाभ दिया जाता है. 

मनपा की ओर से मिलती है आर्थिक सहायता 

योजना के तहत 1 लाख तक की आर्थिक सहायता महापालिका स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जाती है. इससे मरीज उपचार व दवा खरीद सकते हैं. महापालिका की ओर से घातक बीमारियों का इलाज करने के लिए शहर के निजी अस्पतालों के साथ भी करार किया गया है. इसके अनुसार निजी अस्पतालों में फ्री बेड्स रखे जाते हैं. एम्स अस्पताल में भी इसके लिए 10 फ्री बेड्स रखे गए हैं. इस योजना के लिए बजट में हर साल 20 करोड़ तक का प्रावधान किया जाता है.  

10 अस्पतालों के साथ किया गया करार

ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमितों की तादाद दिन-ब- दिन बढ़ती जा रही है. 13 हजार से अधिक संक्रमित मिले हैं तो 500 से अधिक लोगों की मौत कोरोना की वजह से हुई हैं. मनपा द्वारा अपने सभी अस्पतालों में मुफ्त में सुविधा दी जा रही है. ये अस्पताल कम पड़ रहे हैं. इस वजह से मनपा द्वारा निजी 10 अस्पतालों के साथ करार किया हुआ है. इसमें सीएचएस के दरों से बील निर्धारित किया जाता है. तो शहरी गरीबों से सिर्फ 10 प्रतिशत बिल लिया जाता है, लेकिन संक्रमितों की तादाद बढ़ने से मनपा पर वित्तीय बोझ आ रहा है. इस वजह से अब आगामी काल में इन अस्पतालों में सिर्फ शहरी गरीबों को ही सहूलियत के दरों में स्वास्थ्य उपचार दिए जायेंगे. शेष सभी लोगों को अपने जेब से बिल देना होगा.