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  • सिर्फ 25% मजदूर ही काम पर

पुणे. पाइप लाइन और पानी मीटर लगाने का काम का नगरसेवकों के विरोध के साथ ही अब मजदूरों की कमी के कारण भी समान पानी सप्लाई योजना का काम ठंडा पड़ गया है. अभी सिर्फ 25 प्रतिशत मजदूर ही काम कर रहे हैं. दूसरे राज्य से मजदूरों के आने के बाद ही पूरी क्षमता से काम शुरू हो सकेगा. शहर में पानी सप्लाई करने वाली पाइपलाइन कई वर्षों पुरानी होने के कारण 40 प्रतिशत पानी का रिसाव हो जाता है.

 यह जानकारी विभिन्न प्रकार के सर्वे में मिली है. पानी का रिसाव रोकने के लिए और शहरवासियों को पर्याप्त और 24 घंटे पानी मिलने के लिए मनपा ने अगले 30 वर्षों का विचार कर 24 घंटे समान पानी सप्लाई योजना शुरू की थी. इस योजना से नागरिकों को बढ़ी हुई दरों से पानीपट्टी वसूल की जा रही थी.  इस योजना के तहत पानी की संपूर्ण पाइपलाइन बदली जाएगी और शहर के विभिन्न रोड पर 1750 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी.

 घर-घर लगाए जाएंगे जल मीटर

इसके अलावा पानी की टंकियां बनाकर घर-घर में पानी के मीटर लगाए जाएंगे. इस योजना के शुरुआत से ही कोई न कोई आपत्ति आ ही जा रही है. कभी टेंडर प्रक्रिया को लेकर, तो कभी मीटर खरीदी और पानी की टंकियों लेकर इसमे रोडे अटके हैं. इसके अलावा भूसंपादन और अन्य कारणों को लेकर भी यह योजना चर्चा में रही है. इन सब परेशानियों से छुटकारा मिलने के बाद जब यह योजना शुरू की गई, तो पाइप लाइन और पानी के मीटर लगाने के लिए नागरिकों के साथ ही नगरसेवकों ने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया. इस कारण जितनी गति से काम होना था, उतनी गति से नहीं हो सका. अब एक बार फिर कोरोना संकट के कारण योजना के कार्य में रुकावट आई है. मीटर लगाने और टंकी लगाने के काम में अधिकांश परप्रांतीय मजदूर काम कर रहे थे. कोरोना संकट के कारण वे अपने गांव चले गए हैं. उनके वापस आने की संभावना फिलहाल अभी नजर नहीं आ रही है. इससे मजदूरों की कमी के कारण योजना का काम ठंडा हो गया है.