मनपा को 26 दिनों में मिले 100 करोड़

  • 30 नवंबर तक योजना का लाभ
  • स्थायी समिति अध्यक्ष हेमंत रासने की जानकारी

पुणे.  पुणे महापालिका  की स्थायी समिति के अध्यक्ष हेमंत रासने ने महापालिका की आय बढ़ाने के प्रयासों के पहले चरण को पूरा कर लिया है. आयकर बकाया वसूली के लिए लागू की गई  अभय योजना के तहत  26 दिनों में 100 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं. 30 नवंबर तक नागरिक इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. ऐसी जानकारी स्थायी समिति के अध्यक्ष हेमंत रासने ने दी. 

अभय  योजना को खासा प्रतिसाद 

टैक्स पर तीन गुना जुर्माना और जुर्माना से टैक्स बकाया में भारी वृद्धि हुई है.  पिछले साल की बारिश की पृष्ठभूमि और इस साल कोरोना के प्रकोप के कारण हुई आर्थिक तंगी के चकते बकाया राशि वसूलने के लिए बकाया राशि पर लगाए गए 2 प्रतिशत जुर्माने पर 80 प्रतिशत छूट दी जानी चाहिए. इसके लिए स्थायी समिति सदस्यों ने 2 अक्टूबर से 30 नवंबर तक टैक्स  अभय योजना लागू करने का प्रस्ताव दिया था. 

इस बीच, स्थायी समिति की बैठक में एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के सदस्यों ने सभी बकाया राशि को रसहूलियत देने का विरोध किया था. उन्होंने एक स्टैंड लिया कि ये छूट उन लोगों को नहीं दी जानी चाहिए जो ईमानदार करदाताओं के साथ अन्याय करके करोड़ों रुपये के बकाया हैं.  इसके बदले, 50 लाख रुपये तक के बकाये पर रियायत दी जानी चाहिए. इसके अनुसार इस प्रस्ताव को स्थायी समिति ने मंजूरी दी थी. इसके अनुसार इस योजना को खासा प्रतिसाद मिल रहा है. 

42 हजार 100 लोगों ने उठाया लाभ 

अभय योजना पर प्रभावी तरीके से अमल हो, इस हेतु टैक्सविभाग को अतिरिक्त कर्मी मुहैया कर दिए है. क्योंकि महापालिका को इस माध्यम ज्यादा आय कमानी है. इसके अनुसार योजना को खासा प्रतिसाद दिख पाया है. 2 अक्टूबर के अब तक तक यानी 26 दिनों में महापालिका को इस योजना तहत 100 करोड़ 50 लाख का टैक्स मिला. करीब 42 हजार 100 लोगों  ने इस योजना का लाभ उठाया है.  इस बिच महापालिका को टैक्स से अप्रैल माह से अब तक कुल 950 करोड़ की राशि मिल चुकी है. करीब 6 लाख से अधिक  लोगों ने टैक्स का भुगतान किया है.  

शहर में कई आयकर दाताओं ने विभिन्न कारणों से अब तक अपने करों का भुगतान नहीं किया है. यह संख्या दिन-प्रति दिन बढ़ती जा रही है, जिसमें जुर्माना की राशि भी शामिल है. इस वजह से अभय योजना का लाभ उठाकर सहूलियत ले व बकाया टैक्स   का भुगतान करें. 

-हेमंत रासने, अध्यक्ष, स्थायी समिति