फूलों से सजी एसटी बसों में निकली संतों की पालकियां

-पंढरपुर के लिए रवाना

पिंपरी. महामारी कोरोना के संकट की छाया में पैदल पंढरपुर आषाढ़ी यात्रा रद्द करने के बाद देहूगांव से संत तुकाराम महाराज और आलंदी स्व संत ज्ञानेश्वर महाराज की चरण पादुका फूलों से सजी एसटी (महाराष्ट्र स्टेट ट्रांसपोर्ट) महामंडल की दो अलग-अलग बसों में पंढरपुर के लिए रवाना हुईं हैं. जैसा कि जिला प्रशासन ने मंजूर किया था, इन बसों में सिर्फ 20-20 लोग ही बैठे हैं.श्रद्धालुओं ने दोनों बसों को फूलों से सजाया था.बसों में सवार हुए सभी लोगों ने चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था. पुणे से चली यह बसें अब सीधे पंढरपुर में रुकेंगी.

पैदल यात्रा रद्द कर दी गई 

सामान्य समय में पूरे महाराष्ट्र से आषाढ़ी एकादशी पर लाखों की संख्या में तीर्थयात्री इस यात्रा में शामिल होते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पायेगा. क्योंकि इस साल कोरोना के चलते पैदल यात्रा रद्द कर दी गई है. पहले संतों की पादुकाओं को हेलीकॉप्टर के जरिए पंढरपुर ले जाने की तैयारी थी.बाद में एसटी बस से पंढरपुर ले जाने का फैसला किया गया.इन दोनों संतों के अलावा संत सोपानदेव, चांगावटेश्वर देवस्थान की पादुकाएं आज शाम तक पंढरपुर पहुंच रही हैं. पुणे के जिलाधिकारी नवल किशोर राम ने आलंदी से बस को रवाना करने से पहले तुकाराम महाराज की पालकी की पूजा भी की.

सोमवार को ही नाकेबंदी कर दी

सोलापुर पुलिस ने जिला प्रशासन को कोरोना के मद्देनजर आषाढ़ी एकादशी से पहले पंढरपुर में कर्फ्यू लगाने का प्रस्ताव भेजा है. हर साल आषाढ़ी एकादशी पर लाखों श्रद्धालु पंढरपुर में भगवान विट्ठल के मंदिर आते हैं, जो इस साल एक जुलाई को है. सोलापुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अतुल जेंडे ने बताया कि बाहर के लोग मंदिर के बाहर इकट्ठे ना हों, इसलिए हमने सोमवार को ही नाकेबंदी कर दी है. पंढरपुर में आवाजाही प्रतिबंधित करने के लिए कर्फ्यू लगाने की भी योजना है. पंढरपुर में 30 जून से दो जुलाई तक कर्फ्यू लगाने के लिए एक प्रस्ताव सोलापुर जिलाधिकारी कार्यालय को भी भेजा गया है.

आषाढ़ी एकादशी के दिन पंढरपुर जाएंगे सीएम

मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि वह एक जुलाई को आषाढ़ी एकादशी के दिन पंढरपुर के विट्ठल मंदिर में पूजा करने जाएंगे और भगवान से प्रार्थना करेंगे कि दुनिया को कोरोना के संकट से मुक्ति दिलाएं. पंढरपुर के मंदिर में पहली पूजा करने का सम्मान राज्य के मुख्यमंत्री को परंपरागत रूप से दिया जाता है.मुख्यमंत्री ने सभी धर्मों के लोगों को संकट के समय में अपने रीति-रिवाजों और त्योहारों को घरों में ही मनाने के लिए धन्यवाद दिया.मंदिर प्रशासन ने जिन लोगों को पास दिया है, केवल वही मंदिर परिसर में दाखिल हो सकेंगे.

उत्सव को इस साल सादगी से मनाने का निर्णय 

आमतौर पर लाखों लोग इस दौरान यहां आते हैं, लेकिन कोरोना के प्रकोप को देखते हुए अधिकारियों ने उत्सव को इस साल सादगी से मनाने का निर्णय किया है. आषाढ़ के माह में देहू से संत तुकाराम महाराज और आलंदी संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकियां पंढरपुर के लिए निकलती हैं.इसमें राज्यभर से लाखों वारकरी पैदल ही शामिल होते हैं.इस पालकी सम्मेलन को सैकड़ों सालों की ऐतिहासिक परंपरा है, जो महाराष्ट्र के लाखों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा है.इस साल वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते इस पालकी सम्मेलन पर शुरू से ही अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे थे.जिला प्रशासन के साथ दोनों देवस्थानों के विश्वस्तों एवं वारकरी प्रतिनिधियों की बैठक में यह तय किया गया कि इस साल पैदल पालकी यात्रा नहीं निकाली जाएगी.

 श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित किया गया

800 साल से चली आ रही इस अनूठी पालकी यात्रा में तीसरी बार श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित किया गया है.इससे पहले साल 1912 में प्लेग के चलते और 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के चलते पंढरपुर में भक्तों की संख्या कम की गई थी.साल 2019 में हुई यात्रा में तकरीबन 5 लाख लोग और 350 दिंडियां शामिल हुईं थी.पुरानी परंपरा के अनुसार महाराष्ट्र समेत देश के कोने-कोने से श्रद्धालु संत तुकाराम और संत ज्ञानेश्वर की पालकी लेकर पंढरपुर आते हैं.