Justice should be done on Krishna Janmabhoomi on the lines of Ayodhya

1585 में बाबर के आने के बाद से विध्वंस का भयानक सिलसिला चलता ही रहा. जहां हजारों-लाखों हिंदू भक्त एकत्र होते थे, ऐसे मंदिरों को निशाना बनाया गया.

    इस बात में तनिक भी संदेह नहीं कि हिंदुओं की आस्था, अस्मिता व मनोबल पर प्रहार करने के लिए 12वीं सदी से मुगल हमलावरों ने लगातार आक्रमण कर मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाने, मूर्तियों को खंडित करने का अमानवीय दुष्कृत्य किया. मंदिरों की संपत्ति लूटने और इस्लाम का वर्चस्व निर्माण करने का इरादा रखने वाले आक्रांताओं का प्रमुख लक्ष्य मंदिर तोड़ना ही था. 1585 में बाबर के आने के बाद से विध्वंस का भयानक सिलसिला चलता ही रहा. जहां हजारों-लाखों हिंदू भक्त एकत्र होते थे, ऐसे मंदिरों को निशाना बनाया गया.

    बाबर के सिपहसालार मीर बाकी ने अयोध्या का राम मंदिर ढहा कर वहां बाबरी मस्जिद बनवाई तो बाबर के वंशज भी ऐसी हरकतों में लगे रहे. औरंगजेब के काल में 1660 के आसपास उसके सूबेदारों ने मथुरा को निशाना बनाया और केशवराय के मंदिर को तोड़ा. राम जन्मभूमि हो या कृष्ण जन्मभूमि, वहां मस्जिद जरूर बनाई गई. इतिहासकार यदुनाथ सरकार तथा पुरातत्ववेत्ता अलेक्जेंडर कनिंघम ने वर्णित किया है कि मथुरा में मंदिरों का विध्वंस किया गया.

    अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर का निर्माण जारी है तो मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि में भव्य मंदिर का निर्माण कैसे हो और पास की मस्जिद को कैसे हटाया जाए, इसे लेकर वृंदावन में संत समाज की बैठक हुई. संतों की राय थी कि यदि कृष्ण जन्मभूमि से संबंधित जितने भी पक्ष हैं, उन्हें सही तरीके व सबूतों के साथ पेश किया जाए तो कृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में निर्णय होगा. एक टीम बनाने का विचार हुआ जो सबूतों को जुटाने का काम करेगी.

    सड़क पर किसी प्रकार का आंदोलन न करते हुए उचित रूप से न्याय प्राप्त किया जाएगा. कुछ संत इस बात से सहमत थे कि मुस्लिम पक्षकारों के साथ मिलकर अदालत के बाहर भी बातचीत करनी चाहिए और उन्हें इस बात का विश्वास दिलाना चाहिए कि यह श्रीकृष्ण जन्मभूमि की ही जमीन है. यदि मुस्लिम बिना किसी विवाद के इस पूरी जमीन को सौंप दें तो देश में सौहार्द्र का नया संदेश जाएगा. अयोध्या की तर्ज पर कृष्ण जन्मभूमि के लिए न्याय की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं.