डॉक्टर नहीं ड्राकुला, 50 से ज्यादा की हत्या करने वाला शैतान

कौन सोच सकता था कि कोई डॉक्टर भी खून का प्यासा शैतान निकलेगा! लोग डॉक्टर को जान बचाने वाला, ईश्वर का रूप मानते हैं लेकिन यूपी के अलीगढ़ जिले के पुरेनी गांव का बीएएमएस डिग्री धारी डाक्टर देवेंद्र शर्मा हैवान से भी बदतर निकला. उसने दिल्ली और अन्य राज्यों में ट्रक व टैक्सी ड्राइवरों की हत्या के 50 से ज्यादा मामलों को अंजाम दिया. उसने पुलिस के सामने बेशर्मी से कबूल किया कि 50 से ज्यादा इंसानों की जान लेने के बाद उसने अपने शिकार की गिनती करना ही छोड़ दिया था. पुलिस ने दावा किया कि वह हत्या के संभवत: 100 से भी ज्यादा मामलों में शामिल रहा. उसने 1995 में अलीगढ़ के छारा गांव में फर्जी गैस एजेंसी शुरू की और आपराधिक गतिविधियों में लग गया. यह डॉक्टर और उसके गिरोह के लोग एलपीजी सिलेंडर ले जाने वाले ट्रकों को लूटकर ड्राइवर की हत्या कर देते थे.

अपनी फर्जी एजेंसी से वह चोरी के गैस सिलेंडर बेचता था. वह अपहरण और हत्या के कई मामलों में दोषी करार दिया जा चुका है. दिल्ली, यूपी, हरियाणा और राजस्थान में उसके खिलाफ मामले दर्ज हैं. हत्या के एक मामले में पैरोल की अवधि खत्म हो जाने के बाद वह 6 माह से दिल्ली के निकट बपरोला में रह रहा था जहां पुलिस ने उसे धर दबोचा. इसे तो बहुत पहले इसके किए की कठोरतम सजा मिलनी चाहिए थी. यह कैसी व्यवस्था है कि जिसमें ऐसे दुर्दांत हत्यारे को पैरोल पर छोड़ा जाता है और फिर वह जेल लौटने की बजाय आजादी से रहने लग जाता है? यह शातिर अपराधी 1994 में किडनी बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह में शामिल हो गया था.

2004 में गुरुग्राम में किडनी रैकेट के भंडाफोड़ के दौरान उसे कई अन्य डाक्टरों के साथ गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में वह कई राज्यों में जेल जा चुका है. पैरोल की अवधि खत्म होने के बाद इस शैतान डाक्टर ने बपरोला में एक विधवा से शादी कर ली और प्रापर्टी का कारोबार करने लगा था. विभिन्न राज्यों की पुलिस को उसकी तलाश थी. ऐसे खूनी दरिंदे का बाहर रहना समाज व मानवता के लिए बेहद खतरनाक है. इसे तो पैरोल देना ही नहीं चाहिए था. किसी अपराधी को एक हत्या पर मृत्युदंड दिया जाता है जबकि इस शैतान ने तो 50 से ज्यादा लोगों की निर्मम हत्या व लूटपाट की है. विकृत मानसिकता के इस अपराधी को जिंदा रहने का कोई हक नहीं है. इसे प्राणदंड दिया जाना चाहिए.