Health workers on strike, work in Sadar Hospital stalled

    अकोला. स्वास्थ्य विभाग द्वारा लागू किये जा रहे प्रभावी उपायों से अमरावती संभाग के पांच जिलों में सिकल सेल रोगियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है. वर्तमान में विभाग में केवल 82 रोगियों का परीक्षण पाजिटिव पाया गया है. उल्लेखनीय है कि जून माह में यह संख्या 140 थी. विभाग में फिलहाल 82 लोगों में सिकल सेल पाया गया है, जिनमें से 40 मरीज यवतमाल जिले में पाए गए हैं.

    अमरावती जिले में 26, अकोला जिले में 4, बुलढाना जिले में 10 और वाशिम जिले में 2 मरीज इस बीमारी से पीड़ित पाए गए हैं. सभी पांच जिलों में इस बीमारी के 797 वाहक पाए गए हैं. सिकल सेल वाले लोग एक दूसरे से शादी करने पर बीमार हो सकते हैं. इसलिए शादी से पहले सभी को सिकल सेल टेस्ट करवाना चाहिए, यह आहवान स्वास्थ्य उप संचालक डा.राजकुमार चौहान ने किया है. उन्होंने बताया कि सिकल सेल एक प्रकार का हीमोग्लोबिन रोग है.

    एक आनुवंशिक दोष रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन में एक दोष का कारण बनता है. इस रोग में ऑक्सीजन की कमी के कारण लाल रक्त कोशिकाएं अंग्रेजी अक्षर सी के आकार की हो जाती हैं. रोगी को देखकर या उसकी नब्ज की जांच करके रोग का निदान नहीं किया जा सकता है. इसके लिए रक्त का प्राथमिक सोल्युबिलीटी परीक्षण किया जाता है. यदि परीक्षण सकारात्मक है, तो व्यक्ति का एक विशिष्ट प्रकार के परीक्षण का निदान किया जाता है जिसे हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरिसिस कहा जाता है. 

    दो तरह के मरीज होते हैं

    इस बीमारी के दो तरह के मरीज होते हैं. इसका एक शिकार और दूसरा वाहक होता है. वाहक रोग के कोई लक्षण नहीं दिखाता है. यह समुदाय में सिकल सेल रोग को बढ़ाने का काम करता है. इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को अत्यधिक कष्ट होता है. रोग के अलग-अलग लक्षण होते हैं. रक्त कोशिकाओं के आकार के कारण, वे एक दूसरे से जुड़े होते हैं, जिससे रक्त वाहिकाओं में आंतरिक रक्तस्राव होता है. इसलिए कभी-कभी रोगी के अंगों में बहुत दर्द होता है.

    ऐसे में मरीज को बाहर से खून देना पड़ता है. इस रोग में रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. कभी-कभी रोगी को सांस की तकलीफ और पीलिया होता है. रक्त दोष के कारण रोगी एनीमिया से पीड़ित प्रतीत होते हैं. सिकल सेल वाले व्यक्ति को सिकल सेल वाले किसी अन्य व्यक्ति से शादी करने से बचना चाहिए. विभाग के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं ग्रामीण अस्पतालों में सिकल सेल निदान नि:शुल्क किया जाता है, यह जानकारी डा.चौहान ने दी है. 

    डे केयर सेंटर शुरू है

    ऐसे मरीजों के इलाज के लिए जिला महिला अस्पताल में डे केयर सेंटर शुरू किया गया है. रोगी को डॉक्टरी सलाह के अनुसार फोलिक एसिड की गोलियां, दर्द निवारक, संक्रमण और बुखार का त्वरित उपचार, हाइड्रोप्सी यूरिया आदि दिया जाता है. सिकल सेल रोग को पूरी तरह से ठीक करने के लिए शोध किया जा रहा है. – डा.राजकुमार चौहान (स्वास्थ्य उप संचालक)

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    संभाग में स्थिति
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    जिला            पाजिटिव मरीज           वाहक 

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    अकोला                  04                   73

    अमरावती                26                 213

    बुलढाना                 10                   20

    वाशिम                   02                   15

    यवतमाल                40                  476

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