साकोली डिपो से छुटी एक एसटी बस, 26 वे दिन भी नहीं निकला हल

    भंडारा. परिवहन महामंडल का सरकार में विलिनिकरण करने की मांग को लेकर एसटी कर्मचारियों ने आंदोलन पुकारा है. परिवहन मंत्री ने की पगार वृद्धी मंजूर नहीं होने से गुरूवार 26 वे दिन भी एसटी महामंडल के कर्मचारियों का आंदोलन शुरू ही है. इस दौरान कोई भी परिस्थिति में गुरूवार को डयुटी पर उपस्थित रहने का अल्टीमेटम दिया गया था. किंतु केवल 2 वाहक व 2 चालक ऐसे 4 लोगों को छोडकर भंडारा विभाग के अन्य कर्मचारी अभीतक आंदोलन में होने की जानकारी है. 

    बुधवार को परिवहन मंत्री अनिल परब ने महामंडल के कर्मचारियों को पगार वृद्धी की है. किंतु राज्य सरकार में महामंडल का विलिनिकरण करने यह कर्मचारियों की मुख्य मांग है. इसी मांग पर कर्मचारी अभीतक अडे  होकर मुंबई के आझाद मैदान के साथ राज्य भर के सभी डिपो में एसटी कर्मचारियों का आंदोलन शुरू है. परिवहन मंत्री ने पगार वृद्धी देकर केवल गाजर दिखाने की भावना आंदोलनकर्ताओं में है. परिवहन मंत्री ने पगार वृद्धी की किंतु हमको वह मंजूर नहीं. एसटी कर्मचारियों का आंदोलन शुरू ही होकर सरकार में विलिनिकरण करने की मांग पर हम अडे है ऐसी प्रतिक्रिया उन्होंने व्यक्त की. 

    लगी है सभी की निगाए  

    पिछले 26 दिनों से कर्मचारी आंदोलन पर है. सरकार ने कर्मचारी संगठन से चर्चा कर हल निकालने का प्रयास कर पर्याय सामने रखा है. किंतु कर्मचारी संगठन अपने निर्णय पर अडे है. जिससे यह आंदोलन और कोनसी दिशा की ओर जाता है इस ओर सभी की नजरे लगी हुई है. इस दौरान अंदाजन महीना होने को आ रहा है. आंदोलन पिछे नहीं लेने से आम यात्रियों के हाल हो रहे है. आंदोलन की वजह से महामंडल का साडे 300 करोड रु. का अंदाजन नुकसान हुआ है. 

    कर्मचारियों पर कार्रवाई-चंद्रकांत वडस्कर  

    आंदोलन खत्म होने के लिए राज्य सरकार ने एसटी कर्मचारियों पर कार्रवाई करना शुरू किया था. भंडारा विभाग के 6 डिपो अंतर्गत 92 कर्मचारियों को अभीतक निलंबित किया गया है. गुरूवार को एक कार्रवाई की गयी है. तो कुल 86 ठेका कर्मचारियों पर सेवा समाप्ती की कार्रवाई हुई है. इसमें गुरूवार को कार्रवाई हुए 14 लोगों का समावेश होने का विभागीय यातायात अधिकारी चंद्रकांत वडस्कर ने बताया है.  

    साकोली डिपो से निकली बस  

    भंडारा विभाग में भंडारा, पवनी, साकोली, तुमसर, तिरोडा,  गोंदिया ऐसे 6 डिपो है. इस डिपो में 1,835 कर्मचारी कार्यरत है. 367 बसेस होकर प्रति दिन 2,652 फेरिया होती है. इस दौरान आंदोलन की वजह से यह फेरियां बंद है. सरकार के अल्टीमेटम के पश्चात साकोली डिपो के 4 कर्मचारी काम पर रूजु हुए. 

    साकोली से भंडारा यह एकमेव बस गुरूवार को दौडी. उसमें 10 लोगों ने यात्रा किया. इसके पूर्व साकोली डिपो से 15 नवंबर को पुलिस संरक्षण में बसफेरी निकली थी. किंतु उसके पश्चात वह बंद की गयी थी. जिससे यह बस प्रति दिन शुरू रहेगी क्या इस संबंध में संदेह निर्माण हुआ है. 

    यात्रियों को होती है परेशानी 

    पिछले 26 दिनों से शुरू होनेवाले इस आंदोलन की वजह से आम यात्रियों को बडी परेशानी का सामना करना पड रहा है. शाला में जाने के लिए पास पर यात्रा करनेवाले विद्यार्थी, ज्येष्ठ नागरिक, बीमार व्यक्ती, स्वातंत्र्य संग्राम सैनिक, विकलांग, वयोवृद्ध व अन्य जरूरतमंद व्यक्तियों को बस से सहुलियत के दर से यात्रा करने की सुविधा रहती है. 

    किंतु इन सभी को अभी आर्थिक भुर्दंड पड रहा है. दुर्धर बीमारी से पीडित व्यक्ति को उपचार के लिए ले जाने के लिए बस यात्रा का लाभ मिलता है. किंतु गरीब, जरूरतमंद एवं आम परिवार को निजी वाहन से जाना पडता है. जिससे एसटी के कर्मचारियों को ही नहीं तो आम लोगों को भी यह आंदोलन खत्म होने की प्रतिक्षा लगी है. 

    निजी यातायात बढी 

    एसटी का आंदोलन होने का लाभ उठाकर निजी यात्री यातायात बडे पैमाने पर बढी है. एसटी से अधिक शुल्क वसुला जा रहा है. आम लोग इस मनमानी को परेशान हुए है. किंतु यात्रा के लिए अन्य पर्याय नहीं होने के कारण मुंग खाकर निजी वाहन चालकों की मनमानी सहनी पड रही है.