Pravasi Majdur, Bhandara

  • प्रलंयकारी बाढ के लिए याद रहेगा साल

भंडारा. सदियों की इतिहास में संभवत: वर्ष 2020 ऐसा एकलौता साल रहा होगा, जहां प्रमुख गतिविधियां बमुश्किल 4 महीने तक सीमट गयी हो. कोरोना महामारी में लगभग 6 महीने कडे लाकडाऊन में गुज़रे. देश के बंटवारे के बाद सबसे बडे पलायन की तस्वीर भंडारा से गुजरते राष्ट्रीय महामार्ग में देखी गयी. पैदल चलते हुए सैकडों, हजारों किलोमीटर की दूरी बच्चे, बुढे, गर्भवती माताओं ने तय की. लगातार चलने से पैरों में दरार पड चुकी थी. गला सूख चुका था. खुली आकाश की निचे में सोने की नौबत आयी थी. लेकिन दिल दहला देनेवाली तस्वीर के बीच ही प्रांत, भाषा, जाति एवं धर्म के भेद को किनारा कर पेयजल एवं भोजन बांटते हुए शिविरों ने भंडारा जिले की शान बढाई. वैनगंगा में आयी बाढ में जब पीडितों का सब कुछ लूट गया. लोगों आगे आए एवं त्रासदी की तीव्रता को कम करने में अपना योगदान दिया.

कोरोना की महामारी ने भंडारा जिलावासियों को बहुत कुछ सीखाया. पड़ोसियों को आपस में मिलाया. बुरे वक्त में लोगों ने आगे बढ कर ईकदूसरे की मद्द की. राजनीतिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं ने खुले दिल से अनाज एवं अन्य सामग्री बांटी. सबसे क़ाबिले तारीफ कार्य कोरोना योद्धाओं को रहा. अस्पताल कर्मी, सरकारी कर्मचारी, स्वच्छता कर्मी की सेवा के लिए पूरा समाज ऋणी रहेगा. गर्मी के दिनों में श्मशानभूमि में पीपीई कीट पहनकर मृतकों का अंतिम संस्कार करते स्थानीय नप कर्मियों की तस्वीर ने पूरे समाज को अंर्तमूख कर दिया था.

Bhandara Flood

राजनीति में उठापटक

जिला परिषद एवं पंचायत समिति कार्यकाल जुलाई 2020 में सप्ताह हुआ. कोरोना की वजह से चुनाव टाले गए. प्रशासक के तौर पर क्रमश: जिप सीईओ एवं बीडिओ को जिम्मेदारी मिली. अलबत्ता चुनाव घोषणा किसी भी समय हो सकते है, यह मानते हुए संभावित उम्मीदवार अपनी तैयारियों में व्यस्त रहे. पदवीधर चुनाव के जरीए महाआघाडी सरकार के घटक दल शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस एवं कांग्रेस ने लामबंद होते हुए भाजपा को जमीन सच्चाई से रूबरू कराया. वहीं भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी उठापटक ने भी भाजपा को भीतर ही भीतर परेशान रखा. बडे नेताओं अपनी गुटबाज़ी में व्यस्त रहे. भाजपा के लिए बडी उपलब्धि यही रही कि विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव लडे चरण वाघमारे अपने समर्थकों के साथ भाजपा में वापिस लौटे. साल बिताते बिताते भाजपा ने अपने जिलाध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी लाखनी निवासी सहकार नेता शिवराम गिरीपुंजे को दी है. उम्मीद है कि 2021 भाजपा के लिए कुछ खास होगा. जहां तक कांग्रेस की बात है कि जिलाध्यक्ष मोहन पंचभाई के नेतृत्व ने कांग्रेस राष्ट्रवादी कांग्रेस जिलाध्यक्ष नाना पंचबुद्धे अपनी पैठ को मजबूत करने में जुटी हुई है.

मंत्री विश्वजीत कदम को भंडारा जिले के पालकमंत्री पद की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी. कोरोना काल में कदम की बजाए सुनील केदार को भंडारा भेजा गया. कोरोना ग्राफ कम होने के पश्चात पुन: कदम को पालकमंत्री बनाया गया. कोरोना को बढने से रोकने में जिलाधिकारी एमजे प्रदीप चंद्रन की रणनीति सफल रही थी. उन्हे एसपी अरविंद साळवे को मजबूत साथ मिला था. लेकिन साल के मध्य में उनकी बजाए क्रमश: संदीप कदम एवं वसंत जाधव को ज़िम्मेदारी दी गयी है. जिससे प्रशासनिक तौर पर भंडारा जिले में उथलपुथल पूरे साल जारी रही.

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प्रलंयकारी बाढ की मार

वर्ष 2020 को प्रलंयकारी बाढ के लिए याद किया जाता रहेगा. बडे बुजुर्ग बताते है कि साल 1997 के बाद पहली बार बाढ का रौद्र रूप देखा गया गया. पूरे 48 घंटे तक नदी किनारे का बडा हिस्सा जलमग्न रहा. सैकडों करोड़ों को नुकसान हुआ. भंडारा में बाढ ने अकेले सब्जी मंडी में ही 50 करोड का नुकसान किया. बेला एवं परिसर में बनी नई कालोनियों में भी बाढ ने जमकर तबाही मचायी. बाढ ने हजारों हेक्टेयर फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया.

अर्थव्यवस्था के लिए भंडारा जिले के लिए कुछ खास नहीं रहा. नए उद्योग नहीं आए. लेकिन चिन्नोर को जीओ टैगिंग देने के लिए सांसद सुनिल मेंढे का प्रयास सराहनीय रहा. भंडारा रोड से जवाहरनगर आयुध निर्माणी तक की बिछाई गयी 22 किमी रेलपटरी से हटाने से जाने पर लोगों की नाराजगी का सामना राजनेता एवं प्रशासन को करना पडा. एक सुखद घटनाक्रम रहा जब किसानों की मांग पर रेलवे डीआरएम ने छिंडवाडा से हावडा तक दौडनेवाली किसान ट्रेन को भंडारा रोड स्टेशन पर स्टापेज दिया. जिसमें भंडारा बीटीबी सब्जीमंडी से मिर्ची की बडी खेप रवाना की गयी.

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सादगी एवं शांति में बिता साल

सदी में वर्ष 2020 ऐसा साल रहा है, जब सभी धार्मिक त्यौहार सादगी एवं बगैर शोर शराबे से मनाए गए. होली, श्रीरामनवमी, डा. आंबडेकर जयंती, 15 अगस्त, ईद, दशहरा, दीवाली और क्रिसमस जैसे बडे पर्वों को घर में ही मनाए गए. 5 अगस्त को श्रीराम मंदिर भूमिपूजन पर लोगों ने घर के बाहर निकालकर हर चौहारे पर प्रतिमा पूजन कर एवं गांव शहर को केसरिया पताकाओं से सजाकर अपनी खुशी का इज़हार किया था.