आंदोलन से 335 बस फेरियां रद्द, 8 दिनों में 70 लाख रु. का नुकसान

335 bus transport canceled, due to agitation, Rs. 70 lakhs , Loss in 8 days

    गोंदिया. महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर 31 अक्टूबर से आंदोलन शुरू किया है. जिससे गोंदिया डिपो की बसों का परिचालन पुर्णत: ठप हो गया है. इसी में ऐन  दिवाली में कर्मचारियों की हड़ताल से यात्रियों के हाल बेहाल हो रहे है.

    गोंदिया डिपो के 270 कर्मचारियों में से 40 कार्यालयीन कर्मचारियों को छोड़कर सभी चालक, परिचालक व वर्कशॉप के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो गए है. जिससे गोंदिया डिपो से होने वाली 75 बसों की दैनिक 335 से अधिक फेरियों का परिचालन ठप है. इस मौके का लाभ निजी ऑटो, बस, कालीपीली टैक्सी चालक उठा रहे है.

    उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ राज्य सहित राज्य के अन्य जिले व जिला अंतर्गत गोंदिया डिपो के माध्यम से हर दिन 335 से अधिक बसों की फेरियां होती है. इसके माध्यम से डिपो को हर दिन 7 से 8 लाख रु. की आय होती है. जबकि 8 दिनों की हड़ताल की वजह से 60 से 70 लाख रु. का नुकसान हो गया है. इसमें अब निजी यात्री वाहन चालक अधिक किराया भाड़ा लेकर यात्रियों को लूटने में लगे है. इतना ही नहीं वाहन में क्षमता से अधिक यात्री भरकर ले जाया जा रहा है.

    शासन बीच का रास्ता निकाले

    जिले में एसटी बसों से 15 हजार से अधिक यात्री हर दिन यात्रा करते है. इसके माध्यम से निगम को 7 से 8 लाख रु. की आय होती है. लेकिन इस आंदोलन से डिपो का आर्थिक नुकसान हो रहा है. जिससे शासन को इस पर बीच का रास्ता निकालना होगा. ऐसी प्रतिक्रिया रापनि की व्यवस्थापक संजना पटले ने व्यक्त की है.

    न्यायालय के आदेश को दी तिलांजलि

    त्यौहारों के दौरान सर्वसामान्य जनता की उपेक्षा करना उचित नहीं. यह कहकर मुंबई हायकोर्ट ने आंदोलन पर जाने वाले कर्मचारियों को तत्काल काम पर आने के आदेश दिए है. राज्य सरकार को तुम्हारी मांग पर विचार करने के लिए समिति स्थापन करने के निर्देश देंगे. ऐसा भी आश्वासन हायकोर्ट ने कर्मचारियों को दिया है. इतना ही नहीं आंदोलन वापस लो अन्यथा गिरफ्तार करने के निर्देश देंगे. ऐसा संकेत भी न्यायालय ने दिया है. लेकिन न्यायालय के इस निर्देश को भी एसटी कर्मचारियों ने तिलांजलि दी है.