ऑक्सीजन पर रिसर्च करनेवाले कोल्हापुर के साइंटिस्ट की ऑक्सीजन न मिलने से चेन्नई में हुई मौत

    कोल्हापुर. ऑक्सीजन (Oxygen) को अलग-अलग क्षेत्र में कैसे उपयोग में लाया जा सकता है, इस पर रिसर्च करते करते इंटरनेशनल स्तर पर अपना नाम कमाने वाले और अपने इन्ही रिसर्च के लिए कुल सात पेटेंट (Patent) प्राप्त करने वाले कोल्हापुर (Kolhapur) के  युवा साइंटिस्ट (Scientist) का कोविड (Covid) के इलाज के चलते ऑक्सीजन न मिलने से चेन्नई में मौत हो गई। डॉ. भालचंद्र काकडे ऐसा इस साइंटिस्ट का नाम है। डॉ. काकड़े की इस मृत्यु से कइयों के दिल दहला गये हैं।

    डॉ. भालचंद्र काकडे ने कोल्हापुर के शिवाजी विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री विषय में डिग्री प्राप्त की और उसके बाद उन्होंने ऑक्सीजन एवं हाईड्रोजन के उपयोग से अलग-अलग क्षेत्रों में क्या किया जा सकता है इस बात पर रिसर्च करना शुरू किया। इसी रिसर्च में उन्होंने कुल सात पेटेंट लिए। जापान और अमेरिका में भी उन्हें फेलोशिप देकर बुलाया गया। अंतरराष्ट्रीय रिसर्चर के तौर पर उनकी चर्चा दुनिया में हो रही थी। डॉ. काकडे को दुनियाभर से कई राष्ट्रों से ऑफर मिलें, लेकिन उन ऑफर को ठुकराकर डॉ.काकड़े ने  भारत में ही रिसर्च करने का निर्णय लिया।  चेन्नई स्थित एसआरएम रिसर्च इन्स्टिट्यूट में वे प्रोफेसर एवं रिसर्चर के तौर पर कार्यरत रहे। उनकी पत्नी भी उनके साथ रिसर्चर के तौर पर कार्यरत थीं।

    अस्पताल में खत्म हो गया था ऑक्सीजन का स्टॉक 

    विगत कुछ दिनों पूर्व डॉ. काकड़े को कोविड-19 का संक्रमण हुआ, लेकिन सौम्य लक्षण होने के कारण उन्होंने घर पर ही इलाज लेना पसंद किया, लेकिन फेफड़ों में इंफेक्शन बढ़ने से उनका स्वास्थ्य ज्यादा बिगड़ गया। इसलिए उन्हें तत्काल चेन्नई स्थित सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किया गया। दो दिनों से उनका इलाज चल रहा था। उनकी तबियत ठीक हो रही थी। उन्हें व्हेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉक्टरों के इलाज में सफलता मिल रही थी की अचानक मंगलवार की देर रात अस्पताल में ऑक्सीजन का स्टॉक खत्म हुआ। जारी इलाज के तकरीबन दस मरीजों ने ऑक्सीजन की कमी के कारण दम तोड़ दिया। जिसमें डॉ. काकड़े भी शामिल थे। जिस 44 वर्षीय युवा साइंटिस्ट ने कई वर्षों से  ऑक्सीजन क्षेत्र में रिसर्च किया। कई नए शोध किये ।उसी साइंटिस्ट को उसके अंतिम समय में  जरूरत होने पर भी ऑक्सीजन न मिलने से उनका अंत हुआ। दुनियाभर के कई ऑफर ठुकराकर भारत में रिसर्च करने वाले इस कोल्हापुर के साइंटिस्ट का मित्र परिवार भी काफी बड़ा था।