इंदौर की सड़कों पर मुंबई प्रवासियों का जत्था

– जगह-जगह पर लंगर, फल और दूध की सेवा

– विश्राम स्थलों पर पानी, जूता, चप्पल का दान

मुंबई. वैश्विक महामारी कोरोना के कारण राज्य सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन ने दिहाड़ी मजदूरों के साथ गरीबों की कमर तोड़ दी है. पहले लॉकडाउन में बचत की जमा पूंजी खर्च करने के बाद जरूरतमंद लोगों को गांव की याद आने लगी.

सरकार द्वारा बार-बार लॉकडाउन की समय सीमा बढ़ाए जाने से इन गरीबों के धैर्य ने जवाब दे दिया. कारखानों और फैक्ट्रियों में नौकरी और छोटे मोटे काम धंधे कर परिवार का पालन पोषण करते हुए अपने गांव के आश्रितों को संभालने वाले मजदूरों के सामने उत्पन्न हुई भुखमरी की समस्या ने इस वर्ग को इस कदर झकझोर दिया कि यातायात के सभी साधन बंद होने के बावजूद मजदूरों ने पैदल ही लगभग 1700 किलोमीटर की दूरी नापने का ऐसा संकल्प लिया जो किसी के लिए भी कठिन हो सकता है. 

सामाजिक संस्थाएं सेवा में जुटे

अखबारों और टीवी चैनलों पर प्रकाशित और प्रसारित खबरों ने मुंबई ही नहीं महाराष्ट्र के अन्य शहरों के मजदूरों को भी आने जाने के साधन नहीं के बावजूद पैदल निकलने के लिए प्रेरित कर दिया. नतीजन सैकड़ों की संख्या में शुरू हुआ पलायन हजारों के बाद लाखों में परिवर्तित हो कर महा पलायन बन गया. लोग मुंबई-आगरा महामार्ग के साथ रेल की पटरियों पर चलने लगे. प्रवासियों की इसी चूक के कारण औरंगाबाद और जालना के बीच रेल पटरियों पर भयानक हादसा हो गया जिसमें 16 निर्दोष अकाल ही काल के गाल में समा गए. इसके बावजूद भी मजदूरों के मजबूर हौसलों में कमी नहीं आयी और वे सड़क मार्ग से परिवार के साथ चलते चले जा रहे हैं. जगह-जगह स्थानीय लोग और सामाजिक संस्थाएं अपनी सामर्थ्य के अनुसार इन प्रवासियों की सेवा में जुटे हुए हैं.

महाराष्ट्र की सीमा पार कर एमपी में प्रवेश

कई हप्तों की कठिन यात्रा के बाद अब मुंबई के प्रवासियों का जत्था मध्य प्रदेश में प्रवेश कर गया है. जिस तरह से मजदूर दीन हीन अवस्था में पसीने से तर-बतर चल रहे हैं, उससे किसी का भी दिल पसीज सकता है. चिलचिलाती धूप और प्रचंड गर्मी से बेहाल यूपी और बिहार के मजबूर मजदूरों के जत्थे में मुंबई, पुणे, रायगढ़ आदि शहरों के लोग शामिल हैं. महा पलायन पर पैदल निकले लोगों का इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों में स्वागत किया जा रहा है. 

चाय नाश्ते के साथ भोजन की व्यवस्था 

जगह-जगह शिविर लगा कर इन्हें चाय नाश्ते के साथ भोजन की व्यवस्था की गई है. कई स्थानों के शिविरों में फल, दूध, पानी आदि के साथ जूते और चप्पल का वितरण किया जा रहा है. अनेक मजदूरों के जूते चप्पल टूट और फट गए हैं. शहरों की जनता निष्काम भाव से सेवा कर रही है. टोल नाके पर प्रवासियों की भारी भीड़ लगी है. जो लोग अपने वाहन से इन मजदूरों को लिफ्ट दे रहे हैं उनसे टोल वसूलने पर लोगों में नाराजगी है. सरकार को टोल फ्री कर मानवता का परिचय देना चाहिए.

आश्रम के संतों ने भी किया प्रेरित

अखंडानंद आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती महाराज ने सड़क मार्ग से नांदेड़ से वृंदावन की यात्रा करते हुए जब इस दृश्य को देखा तो द्रवित हो गए. उन्होंने आश्रम के संतों और अनुयायियों को मानवता की इस सेवा में जुटने की प्रेरणा देते हुए दो दिन का विश्राम लेकर न केवल समाजसेवियों को प्रेरित किया बल्कि प्रवासियों का कुशल क्षेम पूंछकर उनका आत्मबल बढ़ाया. उसके बाद वृंदावन के लिए आगे बढ़े.उन्होंने कहा कि इंदौर के एमजी रोड पर प्रवासी यात्रियों की इंदौर वासी बहुत सेवा कर रहे है. उनमें किसी भी प्रकार का भेदभाव अथवा कोरोना रोग का भय नहीं है, वे नारायण का रूप समझकर कर सेवा कर रहे है है. लोग पैदल, साइकिल, मोटर साइकिल, ऑटो रिक्शा, ट्रेक्टर, टेम्पो, ट्रक आदि उपलब्ध साधनों से जा रहे है. भारतीय लोग दुख में भी सुख खोजते है, वे उस परेशानी को भी आनंद पूर्ण बनाते हुए दुख को सह रहे है. रास्ते मे अनेकों तंबू लगाकर कर लोग भोजन, नाश्ता , जल, चाय आदि की सेवा करनेवाले लोग हमारे लिए प्रेरणा है.