प्रतीकात्मक तस्वीर 
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    नागपुर. स्वास्थ्य सुविधाएं अपग्रेड होने के साथ ही मरीजों का बेहतर इलाज होने लगा है. आजादी से पहले देश में मृत्यु की औसत उम्र 35-40 वर्ष थी लेकिन वर्तमान में यह बढ़कर 50-60 वर्ष हो गई है. ऑरेंज सिटी में शासकीय स्तर पर मिलने वाली सुविधाएं दिनोंदिन अपग्रेड हो रही हैं. इसके बाद भी स्त्रियों में गर्भावस्था के बाद की स्थिति को लेकर जगजागृति उम्मीद के अनुरूप नहीं हो सकी है. सिटी में हर दिन करीब 200 प्रसूति  होती हैं. इनमें सबसे अधिक हिस्सेदारी शासकीय अस्पतालों की है.

    विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हर वर्ष 17 सितंबर को ‘विश्व मरीज सुरक्षा दिवस’ मनाया जाता है. इसके अंतर्गत शासकीय स्तर पर लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जनजागृति मुहिम चलाई जाती है. गर्भधारण के बाद स्त्रियों को नियमित रूप से जांच-पड़ताल करानी चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर होता है. मेडिकल में हर दिन करीब 30, मेयो में 25, डागा में 40-50 और सिटी के करीब 100 से अधिक नर्सिंग होम मिलाकर करीब 200 डिलीवरी होती हैं. 

    किसी भी बीमारी को नजरअंदाज न करें : डॉ. गुप्ता 

    मेडिकल के अधिष्ठाता डॉ. सुधीर गुप्ता मानते हैं कि गर्भवती महिलाओं को योग्य मार्गदर्शन के साथ ही सतर्कता भी बरतनी चाहिए. किसी भी बीमारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. स्वस्थ प्रसूति के लिए पूरा शरीर पूरी तरह स्वस्थ होना जरूरी है. जनजागृति की कमी और योग्य देखरेख के अभाव में दुनियाभर में हर दिन 810 स्त्रियों की गर्भधारण और प्रसूति के बीच मृत्यु हो जाती है.

    पहले ही दिन से देखभाल जरूरी : मानकर 

    औषधि निर्मता प्रमुख डॉ. मनोज मानकर बताते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वेनुसार अविकसित और विकासशील देशों में हर वर्ष 134 मिलियन स्त्रियों को प्रतिकूल परिस्थिति में भर्ती किया जाता है. इनमें से 2.6 मिलियन की मृत्यु हो जाती है, जबकि विकसित देशों में स्थिति बेहतर है. यही वजह है कि स्वस्थ प्रसूति के लिए पहले ही दिन से देखभाल आवश्यक है. 

    मानसिक स्थिति का भी असर : जयश्री 

    स्त्री व प्रसुति शास्त्र विभाग की नर्स जयश्री सरथ मानती हैं कि स्त्रियों की मानसिक स्थिति का अभ्रक पर परिणाम होता है. गर्भधारण के बाद परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो डिलीवरी भी अच्छी होती है. साथ ही नवजात भी स्वस्थ रहता है. लेकिन स्वास्थ्य को लेकर बरती गई लापरवाही की वजह से कई बार नवजात तरह-तरह की बीमारियां लेकर पैदा होते हैं.