• 250 बसों का ही हो रहा परिवहन
    • 500 बसों का संचालन कोरोना से पहले तक होता था

    नागपुर. दिवाली जैसे त्योहार पर दूसरे शहरों में काम करने वाले अपने घरों को लौटते हैं. कोई पुणे से नागपुर आता है तो कोई यहां से अन्य शहरों में जाते हैं. अपने घर पहुंचने के लिए कई ट्रेन का सहारा लेते हैं तो कुछ बस का सफर करते हैं लेकिन त्योहारों के मौसम में ट्रेन की जहां टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है तो वहीं बसों का किराया आसमान छूने लगता है. ले देकर महंगाई का फटका यात्रियों को ही लगता है.

    इस बार डीजल की बढ़ी दरों के कारण बस यात्रियों को कुछ ज्यादा ही जेबें ढीली करनी पड़ रही हैं. महंगे डीजल के कारण बस संचालकों ने किराया बढ़ा दिया है. इसके चलते ऐन दिवाली जैसे त्योहार पर यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. पुणे, सोलापुर, कोल्हापुर, औरंगाबाद, नाशिक, मुंबई, भोपाल, रायपुर, जबलपुर सहित अन्य जगहों का किराया बढ़ चुका है. देखा जाये तो कोरोना काल में बिगड़ी बस वालों की स्थिति अब भी बहुत अधिक नहीं सुधरी है. 

    बढ़ जाती हैं फेरियां 

    ट्रैवल्स संचालक प्रशांत दीक्षित बताते हैं कि दिवाली के समय बसों की फेरियां बढ़ जाती हैं. इसमें कई बार यहां से खाली बसों को भी भेजना पड़ता है. इसके चलते किराया में बढ़ोतरी करनी पड़ती है लेकिन हर बार की तरह इस बार वर्क फ्रॉम होम की वजह से पुणे, हैदराबाद से आने वालों की संख्या कम हैं, वहीं यहां से जाने वालों की संख्या भी बहुत अधिक नहीं है.

    कोरोना काल में ठप पड़ा व्यवसाय अब भी पटरी पर नहीं आया है. नागपुर से जहां पहले 500 बसों का संचालन होता था, वहीं अभी मात्र 250 बसें ही चल रही हैं. 250 बसों में से भी कुछ बसों को यात्री नहीं मिलने के कारण रद्द करना पड़ रहा है. यानी 50 प्रश से कम पर बिजनेस आ गया है. यात्री नहीं मिलने और इंश्योरेंस के साथ टायर्स, डीजल सहित अन्य चीजें महंगी होने से ट्रैवल्स संचालकों को अपना व्यवसाय तक बंद करना पड़ा है.

    इस समय डीजल जहां आसमान पर पहुंच गया है, वहीं टायर 10 प्रश ओर इंश्योंरेंस 5 से 10 प्रश महंगा हो गया है. ऐसी स्थिति में बसों की किस्त निकालना भी मुश्किल हो रहा है. डीजल ने ट्रैवल्स संचालकों की कमर तोड़ दी है. बढ़ते डीजल पर कोई नहीं बोलता लेकिन बस वालों ने किराया बढ़ा दिया तो हाहाकार मच जाता है. आज मेनटेनेंस तक जेब से देना पड़ रहा है.

    फुल नहीं हो पा रहीं बसें

    वे बताते हैं कि बसों को यात्री नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे बसें फुल भी नहीं हो पा रही हैं. आये दिन एक न एक बस को कैंसिल करना पड़ता है. इसके चलते यात्रियों का किसी अन्य बस में बंदोबस्त करना पड़ता है. बस में आधे से कम यात्रियों को ले जाना यानी अपने आपको को नुकसान में डालना. इस समय रीवा, जबलपुर, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, पुणे, कोल्हापुर, सोलापुर, औरंगाबाद, हैदराबाद सहित अन्य स्थानों के लिए यहां से बसें छूट रही हैं. जब तक पूरी तरह से वर्क फ्रॉम होम खत्म नहीं होता, तब तक त्योहारों में बसों को फुल यात्री मिलना संभव नहीं है.

    सरकार का रहे नियंत्रण

    एक यात्री ने कहा कि हर वर्ष त्योहार के समय किराये को लेकर काफी लूट मचती है. किराया एकदम दोगुना कर दिया जाता है. ट्रेन में टिकट कंफर्म नहीं होने से मजबूरी में दोगुना किराया सहन करना पड़ता है. त्योहार के समय यात्रियों से होने वाली लूट को लेकर बस संचालकों पर सरकार का नियंत्रण होना बहुत आवश्यक है. 

    किराये पर एक नजर 

    स्थान दरें

    • नागपुर से पुणे 900-1,500
    • नागपुर से सोलापुर 1,200-1,300
    • नागपुर से कोल्हापुर 1,000-1,200
    • नागपुर से औरंगाबाद 900-1,000
    • नागपुर से नाशिक 900-1,000
    • नागपुर से मुंबई 1,400-1,800
    • नागपुर से भोपाल 750-800
    • नागपुर से रायपुर 500-600
    • नागपुर से जबलपुर 450-700