NCP Youth Congress

    नागपुर. जिले में 5 अक्टूबर को जिला परिषद की 16 सीटों के लिए उप चुनाव होने जा रहे हैं. इनमें कांग्रेस, राकां, भाजपा और शिवसेना पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी हैं. राकां को छोड़कर सभी पार्टी नेता सक्रिय रूप से प्रचार में जुट गये हैं. लेकिन ईडी की जांच में फंसे राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख नॉट रिचेबल होने से पार्टी पदाधिकारियों की मुसीबतें बढ़ गई हैं. वहीं दूसरी पंक्ति के नेता रमेशचंद्र बंग चुनाव को लेकर सक्रिय नहीं हैं. यही वजह है कि राकां की जिम्मेदारी किसके कंधे पर है? यह सवाल खड़ा हो गया है. 

    2019 में जिला परिषद चुनाव में पूर्व मंत्री अनिल देशमुख ने पूरे जोश के साथ अपने उम्मीदवार उतारे थे. कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से राकां के 10 सदस्य चुनकर भी आए लेकिन ओबीसी आरक्षण में कटौती होने से राकां के 4 सदस्य कम हो गये. फिलहाल कांग्रेस की ओर से पशु संवर्धन मंत्री सुनील केदार, प्रदेश उपाध्यक्ष नाना गावंडे व जिलाध्यक्ष राजेंद्र मुलक सहित अन्य नेता जुट गये हैं. भाजपा की ओर से जिलाध्यक्ष अरविंद गजभिये, डॉ. राजीव पोतदार आदि नेता सक्रिय हो गये हैं.

    वहीं शिवसेना की कमान सांसद कृपाल तुमाने और विधायक आशीष जायस्वाल संभाले हुए हैं लेकिन राष्ट्रवादी कांग्रेस में जिलाध्यक्ष बाबा गूजर के कंधों पर पूरा भार आ गया है. यही वजह है नेता के बिना राकां में चुनावी गणित गड़बड़ा गया है. इस वजह से नुकसान भी सहन करना पड़ सकता है.

    जिप के लिए 103, पंस के 156 नामांकन वैध

    जिला परिषद के लिए 100 तथा पंचायत समिति के 31 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है. 21 सितंबर नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है. 27 सितंबर को दोपहर 3 बजे उम्मीदवारों की सूची घोषित की जाएगी. बुधवार को स्क्रूटनी के बाद जिप के लिए 103 नामांकन वैध हुए. वहीं 3 नामांकन अवैध करार दिये गये.

    वहीं पंचायत समिति के लिए 156 उम्मीदवारों के नामांकन वैध और 4 अवैध हुए. जिलाधिकारी विमला आर. ने चुनाव संबंधी समीक्षा की. चुनाव में 2,96,721 महिला मतदाता व 3,19,292 पुरुष मतदाता सहित कुल 6,16,016 मतदाता हिस्सा लेंगे. कुल 1,115 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे. इनमें ग्रामीण भागों में 863 व शहरी भाग में 252 मतदान केंद्रों का समावेश होगा.