Lord Ganesh
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    वर्धा. सनातन हिंदू धर्म के सभी देवी-देवताओं में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश के भक्ति पर्व गणोशोत्सव का शुभारंभ भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर शुक्रवार 10 सितम्बर से हो रहा है. भगवान श्रीगणेश की स्थापना घरों तथा सार्वजनिक मंडलों में की जाएगी. गणेशजी को हर पूजा में प्रथम आराध्य देव के रूप में पूजा जाता है. इस बार शुक्रवार के दिन व चित्रा नक्षत्र में गणेश उत्सव का आगमन हो रहा है, जो पूजन के लिए अत्यंत ही शुभ होगा. 10 सितम्बर को गणेश जयंती तिथि का शुभ समय सूर्योदय से लेकर रात 10 बजे तक रहेगा. इसी प्रकार गणेशजी की स्थापना शुभ मुहूर्त में की जाए तो गणेश भगवान वर्षभर स्थायी रूप से घर में निवास करेंगे. वैसे भी पूजा में गणेश, लक्ष्मी तथा सरस्वती को स्थायी रूप से स्थापित करने की प्रार्थना की जाती है. गणेश स्थापना के समय चंद्रमा का दर्शन निषेध माना जाता है.

    मुहूर्त रात 10 बजे तक

    इस बार गणेश चतुर्थी का समापन रात्रि 10 बजे होगा. इसलिए गणेश स्थापना रात 10 बजे तक करना अच्छा रहेगा. सुबह 6.20 से 10.51 तक, दोपहर 12.30 से 2.01 तक, शाम 5 बजे से 6.30 बजे तक, रात 8.30 से 10 बजे तक, इसी प्रकार गोधुली बेला में शाम 4.30 बजे से 6.30 बजे तक शुभकारी रहेगा. गणेश को स्थाई लग्न के रूप में भी स्थापित करके पूजा अर्चना की जा सकती है. सुबह 6.21 से 8.30 बजे तक सिंह लग्न में, दोपहर 1.04 से 3.09 तक वृश्चिक लग्न में, शाम 6.30 बजे से रात्रि 8.30 तक कुंभ लग्न में स्थापना की जा सकती है. इसी प्रकार सुबह 11.30 से 12.30 तब अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापना शुभदायक रहेगी.

    उत्सव के सभी दिन विशेष महत्वपूर्ण

    गणेशजी की जयंती पर चार ग्रह अपने ही घरों में विराजमान रहेंगे. सुबह सूर्य देव अपनी ही राशि में उदित होने वाले हैं. सिंह राशि में सूर्य भगवान का उदय होगा और सूर्य देव की राशि सिंह है यानि अपनी राशि में बलवान होकर सूर्य भगवान प्रकाशमान होने वाले हैं. इसी प्रकार शनि देव मकर राशि में विराजमान हैं. अपनी राशि में रहने से शनिदेव बलवान रहेंगे. इसी प्रकार कन्या राशि में बुध रहने वाले हैं. तुला राशि में शुक्र रहने वाले हैं. तुला राशि में ही 10 सितम्बर को चंद्रमा का भी आगमन हो जाएगा. यह चारों ग्रह अपनी राशि में रहने से अत्यंत ही शुभकारक योग बनाएंगे. इसी प्रकार 10 दिनों तक शुभकारक संयोग बनने वाले हैं.

    11 को ऋषि पंचमी है और सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा. 12 को सूर्य देव की षष्ठी रहेगी. इसी दिन अनुराधा नक्षत्र में महालक्ष्मी का आह्वान होगा और 3 दिन से व्रत का आरंभ होगा. 13 को ललिता सप्तमी रहेगी. जिसे संतान सप्तमी के रूप में मनाया जाता है. संतान की कामना करनेवालों की मनोकामना पूरी होती है. 14 को महालक्ष्मी व्रत का समापन होगा. महर्षि दधीचि जयंती रहेगी. महालक्ष्मी का विसर्जन भी होगा. 16 को सूर्यदेव मध्य रात्रि को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे. 17 को जल झूलनी एकादशी है. 18 को शनि प्रदोष व्रत रहेगा. 19 को अनंत चतुर्दशी महोत्सव और भगवान गणेशजी की प्रतिमाओं का विसर्जन होगा. 20 सितम्बर से पूर्णिमा श्राद्ध का शुभारंभ होगा.