Learn the importance of Chhath Puja and its glory
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    वर्धा. नहाय-खाय के साथ सोमवार से छठ पर्व की शुरूआत हो चुकी है. छठ पर्व के तहत पहले दिन महिलाओं ने सुबह के समय सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के बाद तीन दिन तक लगातार रखे जाने वाले निर्जला व्रत की शुरूआत की. व्रत शुरू होने के बाद महिलाएं तीन दिन के पर्व के तहत पहले दिन रात के समय सात्विक भोजन किया. वहीं मंगलवार से दो दिन तक निर्जला व्रत रखा जाएगा़  महिलाएं  बुधवार को मनाए जाने वाले छठ पर्व के दौरान शाम के समय अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद निर्जला व्रत समाप्त करेंगी.  

    पवनार नदी तट पर मनाया जा रहा 

    छठ का पर्व पवनार नदी तट पर मनाया जाता है़  पर्व के दौरान बड़ी संख्या में परिवार हिस्सा लेने के लिए यहां पर पहुंचते हैं. यह पर्व कुल मिलाकर चार दिनों तक चलता है. इसकी शुरूआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और सप्तमी को अरुण बेला में इस व्रत का समापन होता है. कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय-खाय के साथ इस व्रत की शुरूआत होती है. इस दिन से स्वच्छता की स्थिति अच्छी रखी जाती है. पहले दिन लौकी और चावल का आहार ग्रहण किया जाता है. 

    सूर्य की उपासना से मिलती है ऊर्जा 

    कार्तिक मास में सूर्य अपनी नीच राशि में होता है. इसलिए सूर्य देव की विशेष उपासना की जाती है, ताकि स्वास्थ्य की समस्याएं परेशान ना करें. षष्ठी तिथि का संबंध संतान की आयु से होता है, इसलिए सूर्य देव और षष्ठी की पूजा से संतान प्राप्ति और उसकी आयु रक्षा दोनों हो जाती है. इस माह में सूर्य उपासना से वैज्ञानिक रूप से हम अपनी ऊर्जा और स्वास्थ्य का बेहतर स्तर बनाएं रख सकते हैं.  

    ग्रह-गोचरों का बना है शुभ संयोग

    इस बार महापर्व पर ग्रह-गोचरों का शुभ संयोग बना है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार सुकर्मा योग में नहाय-खाय के दिन व्रती प्रसाद ग्रहण करेंगी़  सुकर्मा योग में नहाय-खाय के दिन व्रती प्रसाद ग्रहण करेंगी़  वहीं, मंगलवार नौ नवंबर को लोहंडा यानी (खरना), 10 नवंबर बुधवार को सायंकालीन अर्घ्य एवं 11 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती महापर्व का समापन करेंगी.