JNPT में रहे धूल खा रहे 100 करोड़ के स्कैनर

नवी मुंबई. हिन्दुस्तान के बड़े पत्तनों में शुमार नवी मुंबई के जेएनपीटी बंदरगाह पर इम्पोर्टेड कंटेनरों की स्कैनिंग के लिए मंगाए गए 3 मेगा मोबाईल स्कैनर धूल खा रहे हैं. एक साल पहले 100 करोड़ रूपए खर्च कर इन स्कैनरों को फ्रांस से मंगाया गया था. जेएनपीटी, जीटीआई और डीपीवर्ल्ड पत्तनों पर 1 एक एकड़ के भूखंड पर इनके लिए स्कैनिंग हाउस भी तैयार है फिर भी 8 महीने से इनका सेटअप नहीं हो सका है. जबकि इस बीच लाखों संवेदनशील कंटेनर आते रहे हैं.

सिक्यूरिटी एक्सपर्ट की मानें तो इसके पीछे कुछ कस्टम और पोर्ट अधिकारियों और तस्करों की साठ गांठ है जो काली कमाई के लिए स्कैनरों की स्थापना में देरी करवा रहे हैं. हालांकि पोर्ट अधिकारी इन आरोपों को खारिज करते हुए इसकी देरी में कोरोना और लॉकडाउन को बड़ा कारण बता रहे हैं. सवाल ये है कि जब पोर्ट सुरक्षा अतिसंवेदनशील और अतिआवश्यक कार्यों में शामिल है, तब उसे दरकिनार कैसे किया जा सकता है.

रैपिड स्कैन फ्रांस ने भेजा स्कैनर

मिली जानकारी के अनुसार जवाहरलाल नेहरू पोर्ट भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों का सबसे बड़ा पोर्ट है. यहां प्रतिमाह तकरीबन 1.4 मिलियन टीयू कंटेनर विदेशों से इम्पोर्ट होते हैं. जाहिर है इन कंटेनरों में देश विघातक या प्रतिबंधित सामानों की सप्लाई हो सकती है. लाल चंदन, सांपों की केचुली, दुर्लभ जीव, गांजा, चरस कोकीन जैसे मादक पदार्थों की खेप अक्सर यहां पकड़ी जाती रही है जो इसका सबूत देती है. केन्द्र सरकार ने सुरक्षा की संवेदनशीलता देखते हुए रैपिड स्कैन फ्रांस कंपनी से पहली खेप में 8 स्कैनर मंगाए जिनमें से 3 मोबाईल स्कैनर न्वाहा शेवा के जेएनपीटी पोर्ट के लिए मंगाए गए हैं. सूत्र बताते हैं कि एक आधुनिक स्कैनर की कीमत 35 करोड़ से अधिक है.

80 फीसदी का लक्ष्य, 2 फीसदी स्कैनिंग

बता दें कि नवंबर 2019 से पोर्ट में आकर पड़े तीनों मोबाइल स्कैनर सिर्फ इसलिए क्रियान्वित नहीं हो रहे हैं क्योंकि इनका फायनल ट्रायल नहीं हो सका है. यदि स्कैनर लगते हैं तो इससे अंगूठी से लेकर बड़े सामान, द्रव्य अथवा मेटल सबकी परफेक्ट स्कैनिंग हो सकती है.सरका का लक्ष्य है कि बंदरगाह पर 80 से 90 फीसदी इन्पोर्टेड कंटेनर की जांच हो सके. रैपिड स्कैनर मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त हैं.पोर्ट परिसर में 1 एकड़ लैंड पर इनके लिए स्कैनिंग हाउस भी तैयार हो चुके हैं लेकिन अभी भी ये गोदाम में धूल खा रहे हैं. फिलहाल यहां एक या 3 सामान्य स्कैनर हैं जिन्हें कस्टम और जांच विभाग कर्मी चलाते हैं. इनसे हर महीने 2 प्रतिशत स्कैनिंग हो पाती है.

नवंबर तक आपरेशनल करने की तैयारी

रैपिड स्कैनर इसलिए क्रियान्वित हो रहे क्योंकि अभी तक एईआरबी की अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है. उसके लिए साईट एसेसमेंट प्रोसिजर जरूरी थी. फिलहाल अगस्त से टेस्टिंग की शुरूआत हो गयी है. बीते 25 सितंबर को ही टेक्निकल टीम ने साईट एसेसमेंट किया है. यह रिपोर्ट एटामिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड को भेजी जाएगी जिसकी मंजूरी के बाद 3 में से एक स्कैनर का ट्रायल शुरू होगा जो 1 महीने चलेगा. जब सब कुछ ठीक रहा तब उसे आपरेशनल किया जाएगा. शेष दो स्कैनरों का भी यही प्रोसेस होगा. पहले स्कैनर के नवंबर माह में आपरेशनल करने की तैयारी है.

राजन गुरव-चीफ मैनेजर, ट्रैफिक, जेएनपीटी