चीन को सबक सिखाने के लिए हर हिंदुस्तानी है सक्षम

हिंदी भाषी एकता परिषद और राजस्थानी सेवा समिति ने व्यक्त किया मत

ठाणे. लद्दाख की गलवान घाटी में चीन ने हमारे 20 निर्दोष सैनिकों की हत्या धोखे से की. कायर और धोखेबाज चीनियों मे इतना साहस नहीं है कि वह भारत के शेरों के सामने आकर मुकाबला कर सकें, इसलिए उन्होंने जांबाज सैनिकों को रात के अंधेरे में पीठ में छुरा घोंपने का काम किया, फिर भी हमारे जवानों ने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया.

हमारी सेना सीमा पर अपने साहस और वीरता का अद्भुत इतिहास लिखने जा रही है. इस शौर्य गाथा को आने वाली पीढ़ी सदियों तक याद रखेंगी. वही इस छद्म युद्ध में आम भारतीयों की भूमिका अहम हो जाती है हम सबको मिलकर यह है युद्ध लड़ना है. हमें अपनी राष्ट्रभक्ति का प्रामाणिक परिचय देने के लिए तैयार होना है. हर भारतीय जब भी किसी वस्तु की खरीदी करता है तो उसके दिमाग में एक ही प्रश्न आना चाहिए कि कहीं यह वस्तु चीन निर्मित तो नहीं है. मैं चीनी वस्तु को खरीदना तो दूर उसे छूना तक पसंद नहीं करूंगा. मैं चीन निर्मित सभी वस्तुओं की होली जलाने के लिए तत्पर हूं. बस इतनी सी प्रतिज्ञा हर भारतीय को करनी होगी जिससे चीन को हम बड़े पैमाने पर आर्थिक रूप से चोट पहुँचाकर उसकी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकें.

हिंदीभाषी एकता परिषद, राजस्थानी सेवा समिति एवं ब्रह्म फाउंडेशन के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट बी. एल. शर्मा ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपने सभी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज ना सिर्फ चीन का विरोध और उसको जवाब देने का कार्य हिंदुस्तानी सैनिक का है बल्कि हमारा भी यह दायित्व बनता है कि हम जहां हैं वहीं पर चीन को अपने किसी ने किसी माध्यम से चोट पहुंचाने का प्रयास करें. एड. शर्मा ने सभी को अपने राष्ट्रधर्म है और सच्ची राष्ट्रभक्ति का परिचय देते हुए चीनी वस्तुओं का बहिष्कार व स्वदेशी अपनाने का आव्हान किया है एवं इस मुहिम को हर एक भारतीय तक ले जाने की बात कही. इस प्रकार हमारे देशवासियों का पैसा हमारे देश के ही काम आए. एड. शर्मा पिछले कई वर्षों से राष्ट्रवाद एवं देश प्रेम की मुहिम छेड़े हुए हैं इसी कड़ी में वे पिछले 27 वर्षों से अनेक शहीद सैनिकों के परिवार का सम्मान, राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रचार प्रसार एवं जरूरतमंदों की सहायतार्थ विविध कार्यक्रम करते आ रहे हैं.