इंडोनेशिया में दिवाली का त्यौहार है प्रमुख, अहम दूर करने दिवाली से पहले रखे जाते हैं 30 दिनों तक व्रत

इंडोनेशिया में मुस्लिमों की आबादी भले ही हिन्दुओं से ज़्यादा है, लेकिन फिर भी यहाँ की संस्कृति में भगवान राम और महाकाल बसे हुए हैं। इस देश में हिन्दुओं के सारे त्यौहार बड़े उत्सव से मनाए जाते हैं। यहां बाली, सुमात्रा और सुलावेसी, पश्चिमी पापुआ में दीपावली प्रमुख पर्व है।

वहीं इस देश में दीपावली के लिए अनुष्ठान 30 दिन पहले शुरू हो जाते हैं। जहां लोग 30 दिनों तक व्रत रखते हैं, हालांकि अब इस परंपरा को बहुत ही काम लोग निभाते हैं। सुमात्रा के मेदान में रहने वाले डी. सुरेश कुमार इस परंपरा के बारे में बताते हैं कि, 30 दिनों का यह व्रत आत्म नियंत्रण, खुद की खोज, अपनी कमियों को सुधारने और दीपावली से नई शुरुआत करने के लिए किया जाता है। 

इंडोनेशिया में इन 30 दिनों में लोग अपने घर को अच्छी तरह साफ़ करके सजाते हैं। साथ ही रंग-रोगन करते हैं और दीये भी जलाते हैं। दीपावली की सुबह स्नान करके सपरिवार मंदिर जाते हैं। रात्रि में पूजन के बाद माता-पिता और बुजुर्गों के पैर छूते हैं और अहम् को दूर करने के लिए क्षमा मांगते हैं। इसके अलावा आतिशबाजी भी की जाती है। 

गलुंगन मनाते हैं स्थानीय लोग-
यहां कुछ जगहों पर दीपावली अधर्म पर धर्म की जीत के तौर पर मनाया जाता है। जिसे स्थानीय भाषा में गलुंगन कहा जाता है। वहीं यह पर्व इंडोनेशिया मेंहर 210 दिन पर पड़ता है। इसके अलावा यहां हिंदुओं का सबसे बड़ा सांस्कृतिक केंद्र जावा के योगाकार्ता शहर में स्थित प्रम्बनन मंदिर है। जो 850 ईसवी में बनाया गया था। यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में है। मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु और महेश स्थापित है। इसे संजय वंश के शासक रकाई पिकातन ने बनवाया था। इसी मंदिर का पुराविष्ट एंफीथियेटर रोजाना होने वाले रामायण मंचन के लिए मशहूर है। 

1976 से यहां हर रोज़ रामायण का मंचन होता है। यह दुनिया का सबसे लंबे समय से चलने वाला स्टेज शो भी माना जाता है। यहां मुस्लिम समुदाय भी शामिल होता है। सीता के पिता जनक का किरदार करने वाले अली नूर बताते हैं, ‘हम लोग सिर्फ मुस्लिम नहीं, जावानीज भी हैं। यहां हम हिंदू-बौद्ध कहानियां सुनकर बड़े हुए हैं।’

इंडोनेशिया के बाली में 20 हज़ार से ज़्यादा मंदिर है और 80% हिंदू आबादी है। वहीं इस देश के ज़्यादातर लोग रामायण पर विश्वास करते हैं। साथ ही हिंदुओं की धार्मिक शिक्षा में रामायण को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। यह प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा का हिस्सा भी है।