सोयाबीन पर च्रकीभूंगा का अटैक, जिले के अनेक गावों में संक्रमण से किसान चिंतित

    वर्धा. बीते वर्ष खोड इल्ली के कारण सोयाबीन की फसल तबाह होने के बाद इस वर्ष ही फसल पर संकट के बादल छाने लगे है. जिले के अनेक गांवों में चक्रीभूंगा का अटैक होने के कारण किसानों की चिंताएं बढ़ गई है. इस संक्रमण पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो फसल खतरे में आने की संभावना जताई जा रही है.

    सोयाबीन की फसल नकद फसल के रूप में जानी जाती है. सोयाबीन फसल जल्द आने के कारण किसान दूसरी फसल के रूप में रबी की फसल लेता है, जिससे सोयाबीन का क्षेत्र अधिक होता है. परंतु बीते वर्ष सोयाबीन फसल पर खोड इल्ली का प्रकोप होने के कारण किसानों बड़ा आर्थिक नुकसान सहना पड़ा था.

    अनेक किसानों ने सोयाबीन फसल की कटाई तक नहीं की थी, जिससे इस वर्ष सोयाबीन का क्षेत्र कम हुआ. किसानों ने खोड इल्ली के संकट को देखते हुए फसल की अधिक देखभाल करते हुए रासायनिक कीटनाशक का छिड़काव समय समय पर करना आरंभ किया है. परंतु इसके बावजूद भी सोयाबीन पर चंक्रीभूंगा का अटैक हुआ है. 

    पौधे की चोटी पर करता है आक्रमण 

    कृषि मित्र ने दी जानकारी के अनुसार देवली तहसील के अंदोरी, कोल्हापुर, वर्धा तहसील के वायफड गांव के साथ अनेक गांवों में यह संक्रमण पाया गया है. चक्रीभूंगा का अटैक होने के बाद सोयाबीन के पौधे की चोटी पर आक्रमण करता है. जहां से बढ़ता हुआ पूरे पौधे को अपने आगोश में लेने के बाद पेड़ के खोड पर अटैक करता है. खोड में इल्ली आने कारण फसल पर बुरा असर होता है.

    पौधे के सूखने लगते है हरे भरे पत्ते 

    चक्रीभूंगा सबसे पहले पौधे के चोटी को बाधा पहुंचाता है, जिससे चोटी के पत्ते सूखने लगते है. धीरे-धीरे एक के बाद एक पौधे पर संक्रमण फैलता है. तत्पश्चात पौधे अचानक सूखने लगते हैं. शुरू में यह आक्रमण कम होने के कारण किसान को इस बात का पता नहीं चलता है. परिणामवश चक्रीभूंगा का प्रकोप तब तक अधिक हो जाता है.

    पीली पड़ती है सोयाबीन की फसल

    चक्रीभूंगा के कारण सोयाबीन के पत्ते सूखने के साथ ही फसल पीली पड़ने लगती है, जिसके बाद अचानक पौधा सूखकर मुरझाने लगाता है. अचानक यह प्रकोप तेजी से बढ़ता है, जिससे उस पर अंकुश लगाना कठीन हो जाता है. कृषि तज्ञों ने बताया कि समय पर इस पर ध्यान दिया गया तो यह संक्रमण रोका जा सकता है.

    किसानों किया जा रहा जरूरी मार्गदर्शन

    खोड इल्ली व चक्रीभूंगा का प्रकोप पाया जा रहा है. चंक्रीभूंगा की तुलना में खोड इल्ली का प्रकोप अधिक है. दोनों संक्रमण से बचाने के लिये किसानों को मार्गदर्शन किया जा रहा है तथा सर्वेक्षण भी किया जा रहा है.

    -विवेकानंद चव्हाण, तहसील कृषि अधिकारी.