दो दिन के अधिवेशन में कैसे रखे जनता के प्रश्न

  • जिले के विधायकों का सवाल

– गजानन गावंडे

वर्धा. कोरोना का कारण बताकर राज्य सरकार जनता के प्रश्नों से भाग रही है. दो दिन के अधिवेशन में कैसे जनता के प्रश्न रखे, पहिला दिन तो औपचारिकता पुर्ण करने में गया. शेष दिन में क्या होनेवाला है. जिले तथा विदर्भ के साथ अन्याय करने का सिलसिला पुन: एकबार शुरू हुआ है.

कोराना के नाम पर विदर्भ की जनता को गुमराह कर नागपुर का शितकालीन अधिवेशन सरकार ने मुंबई में लिया, वह भी महज दो दिनों का. 288 विधायक को अधिवेशन में कितना समय मिलेगा, ऐसा प्रश्न विधायकों ने उपस्थित किया. राज्य सरकार केवल औपचारिकता कर रही है. दो दिन के अधिवेशन में जनता के हात कुछ नहीं लगनेवाला है. कोरोना के नाम पर जिले का करोडों रूपयों का निधी सरकार डकार गई है. जिला नियोजन समिती को मिलनेवाले निधी में 67 प्रश की कटौती की गई है.

जिला परिषद को नियोजन समिती के माध्यम से करोडों का निधी मिलता है. किंतु कटौती करने के कारण जिला परिषद के सामने निधी की कमी आने से ग्रामीण क्षेत्र की विकास योजनाओं पर संकट आ गया है. सेवाग्राम विकास प्रारूप के निधी में भारी कटौती की गई है. एक तरह से जिले के विकास पर सरकार ने ब्रेक लगाया है. निधी वितरण में सरकार पर भेदभाव करने का आरोप विधायकों ने लगाया है.

दो दिन में कुछ नहीं हो सकता

राज्य सरकार ने औपचारिकता के तौर पर दो दिन का अधिवेशन लिया है़ दो दिन में कुछ नहीं हो सकता़ उम्मीद थी कि, आठ दिन का अधिवेशन रहेंगा़ किन्तु ऐसा नहीं हुआ़ केवल अधिवेशन में अध्यादेश व विधेयक रखे जा रहे है़ विदर्भ व जिले के हाथ निराशा ही लगी है. – डा़ पंकज भोयर, विधायक, वर्धा 

जिले के हाथ निराशा ही

राज्य की सरकार अंधी तथा कर्णबधिर है. उसे जनता के प्रश्नों से कोई लेनदेन नहीं है. प्रश्नों से भागने के लिये औपचारिकता के तौर पर अधिवेशन लिया है. पहले दिन कुछ नहीं हुआ. दुसरे दिन भी कोई उम्मीद नहीं है. शितकाल अधिवेशन से किसान को बडी उम्मीद रहती है. इस प्राकृतिक आपदा के चलते किसानों का बडा नुकसान हुआ है. किसान के हाथ भी निराशी ही लगनेवाली है. – दादाराव केचे, विधायक आर्वी 

जनता के प्रश्नों से भाग रही सरकार

सरकार को जनता के प्रश्नों से कोई सरोकार नहीं है. दो दिन के अधिवेशन में पहिला दिन शोक प्रस्ताव व सप्लीमेंट्री मांगों पर गया. दुसरे दिन 288 विधायकों को कितना समय मिलेगा यह सोच के बाहर है. केवल 5 से 10 विधायक अपनी बात रख पायेंगे. सरकार केवल अपने पार्टी के नेता व विधायकों का काम करने के लिये यह अधिवेशन लिया. दोन दिनों की जगह सरकार दो सप्ताह का अधिवेशन ले सकती थी. आज किसान, मजुदर, बेरोजगारों के साथ अनेक प्रश्न राज्य में है. – समीर कुणावार, विधायक, हिंगनघाट

जनता पर अन्याय

जनता के प्रश्न हल करने के लिये अधिवेशन होता है. ग्रिष्मकाल अधिवेशन भी नहीं हो पाया अब शितकाल अधिवेशन दो दिन का रखा गया है. जिससे सरकार केवल औपचारिकता कर रही है. सत्तापक्ष के नेताओं के सभी काम हो रहे है. विदर्भ के प्रश्न नजरअंदाज करने के लिये अधिवेशन मुंबई में लिया गया. राज्य सरकार निधी के साथ ही सभी स्तर पर विदर्भ के साथ अन्याय कर रही है. – रामदास आंबटकर, विधायक विधानपरिषद