मानसून: बारिश ने तरेरी आंखे, दुबारा बुआई का संकट

  • अनेक गांवो में कम बारिश, वर्धा, आष्टी, देवली
  • तहसील में किसानों का अधिक नुकसान, सोयाबीन बीज की
  • किल्लत, सूख रहे अंकुरित बीज

वर्धा. संकट ओर किसान का नाता इस तरह से बन गया है कि, किसान चाहे पिछा छुडाने की कितनी भी कोशिश करे पर किसी न किसी रुप में संकट आ ही जाता है. अब बारिश का गायब होना किसानों के लिए नया संकट लेकर आया है. बारिश ने आंखे तरेरने से अनेक किसानों पर दुबारा बुआई का संकट आन पडा है. बारिश के अभाव में कई जगहों पर बीज उगे ही नही है. जो बीज अंकुरित हुए है वे भी बारिश के अभाव में सूख रहे है. जिससे अब किसानों की चिंता बढ गई है.

इस वर्ष किसानों को विविध समस्या से जुझना पड रहा है. एक ओर कोरोना का संकट तो दूसरी ओर घर में पडे माल की चिंता. खरीफ का मौसम शुरु होकर भी अनेक किसानों के घर में कपास सहित अन्य कृषि उपज पडी हुई है. जिससे आर्थिक समस्या तो है ही, परंतु आगे के नियोजन के लिए खरीफ की बुआई भी जरुरी थी. जिले में मानसून के बारिश की शुरुआत होते ही किसी तरह उधारी पर पैसे लाकर किसानों ने बुआई कार्य शुरु कर दिया. लगभग 60 से 70 फीसदी क्षेत्र में बुआई का कार्य पूर्ण हुआ. लेकिन बुआई के बाद मानों बारिश ही गायब हो गई है. अनेक क्षेत्र, गांवो में कम बारिश हुई. अब तो गत आठ दिनों से बारिश पूरी तरह से नदारद है. जिस कारण अनेक खेतों में बीज ही नही उगे.

जहां किसी तरह से बीजों की उगाई हुई वह भी अंकुरित पौधे पानी के अभाव में सूख रहे है. जिससे अब किसानों की स्थिति गंभीर बन गई है. आगामी दो दिनों में बारिश नही होती तो किसानों पर दुबारा बुआई का संकट लगभग तय माना जा रहा है. जिससे किसानों बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे है.

वर्धा, आष्टी, देवली में सबसे कम बारिश
वर्धा जिले में शुरुआत में अच्छी बारिश हुई. परंतु जिले के वर्धा, आष्टी व देवली तहसील में सबसे कम बारिश हुई. जिस कारण बारिश के अभाव में अब अनेक जगहों पर बोये गए बीज ही नही उगे है. जिससे किसानों की स्थित बद से बदत्तर होती जा रही है.

सूख रहे अंकुरित पौधे
खेती पूरी तरह से बारिश पर निर्भर रहती है. शुरुआत में अच्छी बारिश होने से अनेक जगहों पर पौधे निकल आए. इन पौधों को जीवित रहने के लिए पानी की आवश्यकता होती है. परंतु गत आठ दिनों से बारिश गायब रहने से अंकुरित पौधे सुखसने लगे है.

कपास-सोयाबीन बीजों की किल्लत
कोरोना महामारी व लॉकडाऊन का असर कृषि पर भी देखा जा रहा है. लॉकडाऊन के चलते कपास, सोयाबीन बाजार में देरी से पहुंच रहे है. किसानों को आवश्यक मात्रा में बीज उपलब्ध नही हो रहे है. कपास-सोयाबीन बीजों की किल्लत है. ऐसे में अगर दुबारा बुआई की नौबत आती है तो, बीज कहा से लाये, यह चिंता किसानों को सता रही है. वही दूसरी ओर सोयाबीन बीज खराब होने की शिकायते भी बढ गई है.

युरिया समेत खाद की भी कमी
बाजार में बीज के साथ साथ फसलों के लिए आवश्यक युरिया समेत अन्य खाद की भी किल्लत निर्माण हो गई है. कृषि विभाग बाजार में खाद या बीज की कमी नही होने का दावा कर रहा है, परंतु दूसरी ओर युरिया समेत अन्य खाद मिलना किसानों के लिए मुश्किल हो गया है.