America raises CAA and human rights issue of India, Chicago city council voted on proposal that criticizes these laws

वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार और पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि वह चाहते हैं कि भारत सभी कश्मीरियों के अधिकारों को बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी लागू करने के साथ ही नागरिकता (संशोधन) कानून को लेकर निराशा जताई। उनके प्रचार अभियान की वेबसाइट पर हाल ही में पोस्ट किए गए ‘जो बाइडेन के मुस्लिम अमेरिकी समुदाय के लिए एजेंडा’ यानी नीति पत्र के अनुसार, ‘‘देश में बहुजातीय तथा बहु धार्मिक लोकतंत्र बनाए रखने और धर्मनिरपेक्षता की पुरानी परंपरा को देखते हुए ये कदम असंगत हैं।”

इन टिप्पणियों के बाद हिंदू अमेरिकियों के एक समूह ने भारत के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पर नाराजगी जताते हुए बाइडेन के प्रचार अभियान से संपर्क किया और उनसे इस पर पुन: विचार करने का अनुरोध किया। समूह ने हिंदू अमेरिकियों पर भी इसी तरह का नीति-पत्र लाने की मांग की। बाइडेन के अभियान ने इस संबंध में सवालों का जवाब नहीं दिया है। बाइडेन के नीति पत्र में कहा गया है कि वह मुस्लिम बहुल देशों और अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी वाले देशों में जो हो रहा है उसे लेकर अमेरिकी मुस्लिमों का दर्द समझते हैं। इस नीति पत्र में भारत में कश्मीर और असम से लेकर पश्चिमी चीन में लाखों मुस्लिम उइगरों को जबरन हिरासत में रखने तथा म्यामां में रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों का एक साथ जिक्र किया गया है।

नीति पत्र में कहा गया है, ‘‘भारत सरकार को कश्मीर के सभी लोगों के अधिकारों को बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकना या इंटरनेट बंद करना लोकतंत्र को कमजोर करता है।” इसमें कहा गया है, ‘‘जो बाइडेन को असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी को लागू करने और उसके बाद वहां जो हुआ उसे लेकर तथा संशोधित नागरिकता कानून को लेकर भारत सरकार द्वारा उठाए कदमों से निराश हुई।” नीति पत्र में कहा गया है कि दशकों से अमेरिका के सांसद और आठ वर्षों तक बराक ओबामा के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति के पद तक रहने वाले बाइडेन को भारत और भारतीय-अमेरिकियों के अच्छे मित्रों में से एक माना जाता है। इसमें कहा गया कि उन्होंने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को कराने में अहम भूमिका निभाई थी और उपराष्ट्रपति के तौर पर हर साल 500 अरब डॉलर तक द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने की पैरवी की थी।

बाइडेन के समर्थक अजय जैन भुटोरिया ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बाइडेन भारत पर असर डाल रहे मुद्दों, सीमा पार आतंकवाद के मुद्दों, कश्मीर में सीमा पार से आतंकवाद, कश्मीर में प्रताड़ित हिंदू अल्पसंख्यक, चीन के साथ हिंद प्रशांत क्षेत्र में मुद्दों और आर्थिक वृद्धि, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, मानवाधिकारों के लिए लड़ाई, जलवायु परिवर्तन एवं वैश्विक सुरक्षा समेत सभी क्षेत्रों में अमेरिका के मजबूत सहयोगी के तौर पर भारत की बढ़ती भूमिका को समझते हैं।” उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हाल ही में अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए एच-1बी और अन्य वीजा रोक दिया। भारत को भी अपनी आबादी और अर्थव्यवस्था के समर्थन में आव्रजन नीति को परिभाषित करने का अधिकार है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं असम के गुवाहाटी में पला-बढ़ा हूं और मैंने सीमा पार से बड़ी संख्या में लोगों को आते देखा तथा पूर्वोत्तर राज्यों में स्थानीय लोगों से महत्वपूर्ण नौकरियां, संसाधन छीनते देखा है।”(एजेंसी)