रमाई आवास के लिए दिनेश का संसार खुले आसमान के नीचे

  • सामूहिक आत्महत्या को लेकर प्रशासन को पत्र

यवतमाल. केंद्र व राज्य सरकार के रमाई आवास योजना के तहत गोधणी के दिनेश कांबले को घरकुल मंजूर हुआ था, लेकिन इस पैसे के साथ घरकुल की नींव रखने के बाद भी प्रशासन ने कोई मदद नहीं की और सभी परिवार को खुले आसमान में नीचे जिवन व्यतित करना पड रहा है. इस संबंध में स्थानीय प्रशासन को सामुहिक आत्महत्या के संबंध में एक पत्र ने प्रशासन में खलबली मचा दी है. 

यवतमाल पंचायत समिति के तहत गोधणी निवासी दिनेश कांबले को घरकुल एक साल पहले मंजूर हुआ था. मंजूरी के पश्चात भी किश्त नहीं मिलने से दिनेश का घरकुल खडा नहीं हो सका, पश्चात जो कुछ भी पूंजी और उधार देकर उसने घरकुल के निर्माण को शुरूवात की. जिसके लिए घरकुल के निर्माण के लिए लोहे की गज लेकर रखे थे, अचानक एक रात में अज्ञात चोरों ने लोहे के गज चुराकर ले गए. जिससे घरकुल के निर्माण में और एक समस्या खडी हो गई. साथ ही स्थानीय ग्रामपंचायत प्रशासन पाणी के लिए किसी प्रकार व्यवस्था नहीं करने से घरकुल के निर्माण का सवाल निर्माण हो गया है, घरकुल के  निर्माण के लिए पानी की उतना जरूरी है.

हालांकि, ग्राम पंचायत प्रशासन किसी भी तरह की सुविधा देने के लिए तैयार नहीं है. गोधनी में पीने के पानी की भारी कमी पैदा हो गई है, कई बिमारियों का सामना भी करना पड रहा है. जिससे रमाई आवास योजना के घरकुल की प्रतिक्षा में दिनेश का संसार फिलहाल खुले आसमान के नीचे जी रहा है, स्थानीय प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो कुझे यह निर्णय लेना होगा, ऐसा दिनेश ने सरकार को सूचित किया है.

मेहनत की कमाई से लिया निर्माण का लोहे के गज चोरी

हमने कडी मेहनत से घरकुल निर्माण के लोहा खरीदा था, लेकिन रात के अधंरे में अज्ञात चोर निर्माण के लाया हुआ लोहा चोर चुराकर ले गया. अब सवाल यह है कि घरकुल कैसे बनाए जाए? दिनेश व उसकी पत्नी मनीषा कांबले और छोटे बच्चों के सामने जिने-मरने का प्रश्न खडा हो गया है, इसे सरकार द्वारा तुरंत हल किया जाना चाहिए. 

 रमाबाई पीलावण,सामाजिक कार्यकर्ता गोदणी.

मेरी समस्या हल करें, नहीं तो सामूहिक आत्महत्या के अलावा विकल्प नहीं,

हम स्थानीय प्रशासन और रमाई घरकुल करनेवाले कर्मचारी मेरी ओर ध्यान नहीं देते हैं. रहने के लिए घर नहीं, जीवित रहने के सवाल ने परिवार के लिए खुले आसमान में दिन गुजारना मुश्किल बना दिया है. इसलिए, हमारे पास सामूहिक आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं है, मेरा अनुरोध है कि प्रशासन इसपर गंभीरता से ध्यान दें.

दिनेश कांबले, लाभार्थी रमाई आवास योजना