मायक्रो फायनान्स कंपनी का फैला जाल

यवतमाल. आम तौर पर, यदि ऋण चाहते हैं तो हम राष्ट्रीयकृत बैंक, नागरी बैंक या पतसंस्था से ऋण के लिए आवेदन करते है. लेकिन इन स्थानों ऋण लेते समय कई दस्तावेजों की आपूर्ति, जमानतदार आदि नियमों का सामना करना पडता है. इसी कडी कम समय, कम दस्तावेज में तत्काल ऋण उपलब्ध करानेवाली मायक्रो फायनान्स अर्थात नोन बैंकिंग फायनान्स कंपनियों ने जन्म लिया है. इन कंपनियों ने अपना कारोबार देश में चल रहा है. भारत में जन्मी इन कंपनियों के पास अरबों रुपये का कारोबार है। इन कंपनियों ने आज भी अपना लक्ष्य निर्धारित किया है.

कंपनियों ने शहरी क्षेत्रों के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. गैर-बैंकिंग वित्तीय नेटवर्क गांवों में फैल गया है और ये कंपनियां अब इन नेटवर्क में कई महिलाओं की बचत को लक्षित कर रही हैं. इस बचत समूह की महिलाएं एक-दूसरे को ऋण की गारंटी देती हैं. ऋण देते समय माइक्रोफाइनेंस कंपनी के पास कुछ मापदंड होते हैं. वह लगभग सभी महिलाओं से पैसा वसूल कर कंपनी द्वारा निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए खुश हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च अशिक्षा दर के कारण, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों ने कई महिलाओं की मेहनत की बचत पर हमला करना शुरू कर दिया है.

यह महिलाओं पर भी किया जा रहा है और कई महिलाएं अब अवसाद से पीड़ित हैं. यवतमाल जिले में, सूक्ष्म वित्त कंपनियों का नेटवर्क लगभग बारह सौ गांवों में फैल गया है और राज्य के हजारों गांवों में महिलाएं सूक्ष्म वित्त की वसूली का शिकार हो रही हैं. यवतमाल जिले में 70 से अधि मायक्रो फायनान्स कंपनियां सक्रिय है, ऐसे कंपनियों को शुरू करने के लिए आरबीआई की अनुमति की आवश्यकता होती है, लेकिन कुछ कंपनियां अवैध रूप से चल रही हैं, विशेषकर यवतमाल जिले, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश इस लगत के राज्यों में कार्यरत गैरकानूनी कंपनियों ने यवतमाल में अपना जाल फैलाया है. शहर के बीचोबीच अपने कार्यालय स्थापित कर वहां से कर्ज का वितरण किया जाता है. यदि आप एक राष्ट्रीयकृत बैंक से ऋण लेते हैं, तो ब्याज दर ग्यारह प्रतिशत तक है. लेकिन मायक्रो फायनान्स कंपनियों ब्याज 30 से 35 फीसदी रहता है, उल्लेखनिय है कि 24 महीनों में कर्ज की किश्त न चुकाने पर उसपर जुर्माना भी वसूला जाता है.

मंगलसूत्र गिरवी रखकर मायक्रो फायनान्स कर्जा किया जाता है चुक्ता, यवतमाल जिले में ही नहीं बल्कि राज्य के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में भी जबरन वसूली से त्रस्त होकर कई महिलाओं ने अपने मंगलसूत्र, घर या किमते चीज गिरवी रखकर किश्त अदा करने के मामले में सामने आ रहे है. विगत माह में कई लोग मायक्रो फायनान्स कंपनियों के एजंट की महिलाओं को धमकियों देकर जबरन कर्ज वसूली की जानकारी भी सामने आए है. दिन-रात महिलाओं कर्ज की वसूली के लिए फोन किए जाते है. अपशब्द बोले जाते है या औरंगाबाद की भाषा का इस्तमाल किया जाता है. अब कई परिवार भी इससे त्रस्त हो गई है. कई महिलाएं अपने घरवालों से छिपाकर ऋण ले लेती है, लेकिन किश्त की वसूली के लिए फोन पर फोन आने से इन मायक्रो फायनान्स कंपनियों के चक्रव्यूह में महिलाएं फंस गई है, जिससे इन महिलाओं ने सरकार को सहायता की गुहार लगाई है.