Nagpur High Court

    यवतमाल. यहां जिला मध्यवर्ती बैंक में भर्ती प्रक्रिया पर लगातार चर्चा हो रही है. बैंक ने मंगलवार को 4 जून को हुई निदेशक मंडल की बैठक के निर्णय के अनुसार 105 सीटों के लिए योग्य उम्मीदवारों की सूची की घोषणा की. हालांकि इस सूची पर आपत्ति जताते हुए नागपुर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी. इसपर 10 जून को सुनवाई होगी.

    बैंक ने 103 क्लर्क और दो चपरासी पदों के लिए चयन सूची प्रकाशित की. हालांकि, इस चयन प्रक्रिया को संचालित करते समय विज्ञापन में आरक्षित सीटों के साथ-साथ चयन प्रक्रिया में सामान्य उम्मीदवारों से अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों के लिए प्रावधान किया जाना चाहिए. उन्हें सामान्य उम्मीदवारों के रूप में शामिल किया जाना चाहिए.

    इस प्रक्रिया के अंत में आरक्षित उम्मीदवारों को उनकी श्रेणी-बिंदु सूची के अनुसार आरक्षण दिया जाना चाहिए, 30 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए, लेकिन भर्ती प्रक्रिया के दौरान इसे लागू नहीं किया गया. 2019 में बैंक ने कोर्ट में रिक्त पदों को भरने का वादा किया था. नौ याचिकाकर्ताओं ने सहमति जताई.

    इसलिए हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी. लेकिन हकीकत में हाईकोर्ट ने जो अनुमति दी थी, वह चयन प्रक्रिया को जारी रखने के लिए थी. यह नहीं बताया कि प्रक्रिया सही थी या गलत. बैंक के छह से सात अलग-अलग डिवीजन हैं. उस विभाग में आरक्षित सीटों के बैकलॉग को हटाने और एक अलग विज्ञापन जारी करने की उम्मीद थी. लेकिन यह प्रक्रिया न करते हुए सीधे चयन सूचि घोषित की थी, इस भर्ती प्रक्रिया को आवाह‍्न देनेवाली याचिका दहेली ग्राम विविध कार्यकारी सहकारी सोसायटी के सभासद विवेक ठाकरे ने उच्च उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में याचिका दायर की. कोर्ट ने सुनवाई के लिए 10 जून की तारीख तय की है.

    याचिकाकर्ताओं के वकील दिग्विजय खापरे ने भी बॉम्बे हाईकोर्ट अपीलीय पक्ष नियम, 1960 की धारा 18 अ के तहत एक याचिका दायर करने के लिए जिला बैंक को नोटिस जारी किया है. नोटिस में यह भी कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया के सिलसिले में नियुक्तियां नहीं की जानी चाहिए. याचिका और अन्य पूरक दस्तावेजों की एक प्रति भी प्रदान की जाती है.

    याचिका ने एक बार फिर बैंक की भर्ती प्रक्रिया को विवादों में डाल दिया है. 4 जून की बैठक में पूर्व अध्यक्ष व 11 निदेशकों ने स्वीकृति के लिए सशर्त प्रस्ताव रखा था.  उन्होंने कहा, ‘अगर भर्ती को लेकर कोई विवाद होता है तो हम जिम्मेदार नहीं हैं, ऐसा स्पष्ट किया गया था. सूची जारी होते ही कोर्ट में याचिका दायर की गई. नतीजा एक बार फिर से पात्र उम्मीदवारों का जीवन अधर में लटक गया है.

    एक साक्षात्कार के बिना अंक

    लिपिक और चपरासी दोनों पदों के लिए युवक पवन मार्कड ने परीक्षा दी थी. उसे लिखित में अच्छे अंक मिले. इसलिए उन्होंने चपरासी पद के लिए इंटरव्यू नहीं दिया. हालांकि, उन्हें सात अंकों के साथ चयन सूची दिखाई गई थी.

    भर्ती को लेकर संशय

    बार-बार आशंका जताई जा रही थी कि जिला बैंक में भर्ती में गड़बड़ी होगी. इसको लेकर कई शिकायतें थीं. इस संबंध में रवींद्र पातोड़े ने शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. भर्ती प्रक्रिया कैसे पूरी होगी, इस पर ध्यान दिया जा रहा है.