मिट्टी से बने जीर्ण-शीर्ण घर से चलता है पोस्ट ऑफिस का कामकाज

  • 100 रू. है किराया

– उमर शरीफ

मारेगांव. 100 रुपए प्रतिमाह से किराए से मार्डी का पोस्ट आफिस का कामकाज पुराने मिट्टी से बने जीर्ण-शीर्ण घर में अपने दिन प्रतिदन के कार्यों को चला रहा है. मिट्टी की दीवार ढहने की कगार पर है. कार्यालय के कर्मी अपने जीवन के जोखिम पर अपना दैनिक कार्य कर रहे हैं. तहसील का पोस्ट आफिस केंद्र सरकार के अच्छे दिन का इंतजार मार्डी वासी कर रहा है.

‘केंद्र सरकार के अच्छे दिन’ की घोषणा का यह विभाग का कार्यालय अच्छे दिन की प्रतिक्षा में है. इस डाक कार्यालय को कब अच्छे दिन आएगें? यह सवाल भी मार्डी की जनता पूछ रहे हैं. ब्रिटिश काल में लॉड डलहौसी ने डाक विभाग बनाया. शुरुआती काल में जिसकी जगह उसको नौकरी, ऐसी नीति ग्रामीण क्षेत्रों में थी. 

आज भी ग्रामीण क्षेत्र में अल्प वेतन पर डाक विभाग का कर्मचारी कार्यरत है. वर्तमान काल में पत्रोद्वारा व्यवहार लुप्त हो गया. फिर भी अन्य महत्वपूर्ण कामकाज डाक विभाग द्वारा चलाया जाता है. इसी वजह से डाक विभाग को अच्छे दिन आए लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के डाक कार्यालयों की बुरी स्थिति हो गई है. मारेगांव तहसील के मार्डी के डाक विभाग का कारोबार डाक प्रमुख के घर में किराये से चल रहा है.

 मिट्टी की दिवार, टूटेफूटे कवेलु की छत, दिवार को बडा छेद, हिलनेवाला दरवाजा यह चित्र डाक घर का है. बरसात में अस्थाई रूप से इस कार्यालय का स्थानांतरण होता है. डाक कार्यालय का किराया 100 रू. अब भी है. कम किराए की वजह से दुसरी जगह मिलना मुश्कील है. डाक विभाग ग्रामपंचायत को जगह की मांग कर रहा है. इस टूटे फुटे कार्यालय में डाक प्रमुख, कर्मचारी के अलावा ग्राहक आते जाते रहते है. लेकिन इस पर अनदेखी हो रही है.