छात्रों के सामने शाला शुरू, छात्रावास बंद का पेच

  • सरकार को सबसे पहले छात्रों की समस्या का समाधान करना चाहिए - साहेबराव पवार

यवतमाल. राज्य सरकार ने एक तरफ स्कूल शुरू किए हैं और दूसरी तरफ हॉस्टल बंद किए हैं. अब तो बिना किसी नियोजन के दसवीं और बारवीं की परीक्षा लेने की घोषणा हुई है. इस निर्णय से प्रमुखता से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी दिक्कत में आ गए है, शिक्षा भारती के जिला अध्यक्ष साहेबराव पवार ने मांग की है कि सरकार को पहले छात्रों की समस्या का समाधान करना चाहिए और फिर परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए. इस संबंध में एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भेजा गया है.

सरकार ने एक महीने पहले नौवीं से बारहवीं कक्षा के स्कूलों और कॉलेजों को शुरू किया है. यह घोषणा की गई है कि 10 वीं परीक्षा 10 की परीक्षा मई माह तो 12 वीं अप्रैल में परीक्षा ली जाएगी, ऐसा घोषित हुआ है. दूसरी ओर, शहर के सभी हॉस्टल अभी भी बंद हैं. ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश छात्र शहरी छात्रावासों में पढ़ते हैं. कोरोना संकट के कारण हॉस्टल को अभी तक खोलने का आदेश नहीं दिया गया है. इसलिए, स्कूल और कॉलेज शुरू होने के बाद भी छात्रों की उपस्थिति नगण्य है. छात्रों का कहना है कि नागरिक कोरोना से संक्रमित होने के डर से अपने कमरे किराए पर लेने से हिचकते हैं.

साहेबराव पवार ने सवाल उठाया है कि ऐसी विकट परिस्थिति में छात्रों को शिक्षा कैसे मिलेगी. ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र स्कूल जाने के लिए मानव विकास मिशन की बसों का उपयोग करते हैं. ये बसें अभी भी बंद हैं. एक छोटे से गाँव से शहर आने वाले छात्र साधारण बस से यात्रा करते हैं. वर्तमान में केवल लंबी दूरी की बसें चल रही हैं और साधारण बसें बंद हैं. इससे छात्रों को स्कूल के साथ-साथ कॉलेज जाना भी बेहद मुश्किल हो गया है. क्या खास है कि ग्रामीण इलाकों में छात्र किसानों के बच्चे हैं. इस वर्ष किसानों ने कपास, सोयाबीन और अन्य फसलों के भारी नुकसान के कारण खुद को वित्तीय संकट में पाया है.

इसलिए, किसानों के बच्चे शहर में रहने की तुलना में यात्रा पर अधिक खर्च नहीं कर सकते. ऐसे में बिना किसी प्लानिंग के परीक्षाएं घोषित कर दी गई हैं. इसलिए, शिक्षा भारती के जिला अध्यक्ष, साहेबराव पवार ने मांग की है कि सरकार को पहले छात्रों की इन समस्याओं को हल करना चाहिए और फिर परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए.

ऑनलाइन सीखने में कठिनाई

कंप्यूटर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण छात्र ऑनलाइन अध्ययन नहीं कर सके. अब स्कूल में डॉरमेट्री के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र से आनेवाले छात्रों की यात्रा समस्याओं के कारण पचास प्रतिशत से कम उपस्थिति है. इसी तरह, छात्रों को पाठ्यक्रम पढ़ाना मुश्किल हो गया है. अब जब परीक्षाओं की घोषणा हो गई है, ग्रामीण छात्र दबाव में हैं. इसलिए, मैंने सरकार से मांग की है कि पहले छात्रों की समस्या को समाप्त किया जाए और उसके बाद ही परीक्षा की तैयारी की जाए.

साहेबराव पवार, जिला अध्यक्ष, शिक्षक भारती