बड़ी दबाव नीतियों से त्रस्त शिवसेना विधायक का,  BJP से जुड़ने का सुझाव

    राजनीति में मित्रता या शत्रुता स्थायी नहीं होती, बल्कि स्वार्थ स्थायी होते हैं. अपने मतलब से नेता पलटी मारने से नहीं चूकते. केंद्र में चाहे जो भी पार्टी सत्तारूढ़ रहे, वह अपने प्रतिपक्षियों को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों जैसे कि सीबीआई, ईडी आदि का इस्तेमाल करती देखी गई है. बीजेपी भी इसका अपवाद नहीं है. जिन विपक्षी नेताओं का दामन दागदार है, वे यदि अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो जाते हैं तो उनके सारे पाप धुल जाते हैं. सरकारी एजेंसियां उन्हें परेशान करना बंद कर देती हैं. यह केंद्र के हाथ में है कि किसके खिलाफ जांच शुरू की जाए, सख्त की जाए या ठंडे बस्ते में डाल दी जाए.

    शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक के लेटर बम से हड़कम्प मच गया है. उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर मांग की है कि बीजेपी के साथ युति कर शिवसेना को बचाओ. बीजेपी से संबंध टूटने से पहले जोड़ लिए जाएं. इसका फायदा भविष्य में होगा. सरनाईक काफी दिनों से अज्ञातवास में हैं. उन्होंने अपने पत्र में महाविकास आघाड़ी के सहयोगी दल कांग्रेस व एनसीपी पर निशाना साधा है. सरनाईक ने कहा कि सत्ता में साथ रहते हुए भी कांग्रेस और एनसीपी हमारे कार्यकर्ताओं को तोड़ रही है. इस तरह शिवसेना को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है तो हमें एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ना अच्छा रहेगा. इससे प्रताप सरनाईक, अनिल परब, रवींद्र वायकर जैसे सहयोगियों और उनके परिवारों को नाहक हो रही परेशानी से छुटकारा मिल सकेगा. पत्र में कहा गया कि कोई अपराध या गलती नहीं होने के बावजूद केंद्रीय जांच एजेंसियां बेवजह परेशान कर रही हैं. एक मामले में जमानत मिलती है तो जानबूझकर दूसरे मामले में फंसाया जाता है. प्रताप सरनाईक के पत्र के बाद नेतृत्व ने शिवसेना विधायकों से संपर्क किया और डैमेज कंट्रोल के प्रयास शुरू कर दिए. शिवसेना सांसद संजय राऊत ने विपक्षियों को चेतावनी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का प्रताप सरनाईक को समर्थन है. हम बाघ का कलेजा रखनेवालों में से हैं. दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि बीजेपी इस बात की टोह ले रही है कि सरनाईक के साथ कितने विधायक हैं.

    शिवसेना पर दोहरा आघात

    सरनाईक ने शिवसेना पर हो रहे दोहरे आघात का संकेत दिया है कि एक ओर सहयोगी पार्टियां शिवसेना कार्यकर्ताओं को अपनी ओर खींचने में लगी हैं तो दूसरी ओर बीजेपी केंद्रीय एजेंसियों के जरिए दबाव बनाती जा रही है. उधर आघाड़ी में शामिल कांग्रेस अपने बल पर चुनाव लड़ने की बात कह रही है. इस पर बीजेपी सांसद किरीट सोमैया ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि प्रताप सरनाईक ने जेल जाने के डर से यह पत्र लिखा है. बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी इसे लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त की. प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि सरनाईक शिवसेना के विधायक हैं. ऐसे में उनके लेटर के बारे में उनके नेता उद्धव ठाकरे को फैसला लेना है. हम लोग शुरू से कह रहे हैं कि शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे ने जीवन भर जिस पार्टी का विरोध किया, उसके घुटनों पर बैठना ठीक नहीं है. पूर्व मंत्री व बीजेपी नेता पंकजा मुंडे ने कहा कि सरनाईक के पत्र से सरकार की मौजूदा स्थिति का अंदाजा लगता है. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि यदि किसी दल का विधायक अपनी पार्टी के अध्यक्ष से कोई बात कहता है तो यह उसकी पार्टी का बयान नहीं होता है.

    उद्धव को पवार पर भरोसा

    मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार पर पूरा भरोसा है कि वे महाविकास आघाड़ी सरकार को पूरे 5 वर्ष चलाने में सहयोग देंगे व अपना मार्गदर्शन जारी रखेंगे. सत्ता में भागीदारी की गरज से कांग्रेस भी सरकार में बनी रहेगी. शिवसेना ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे पवार को अप्रसन्नता हो. वास्तव में एनसीपी ही सरकार में प्रभावशाली बनी हुई है. बीजेपी के साथ जाने की गुहार वे लोग कर रहे हैं जो जांच एजेंसियों से डरे हुए हैं. जब उद्धव ठाकरे खुद ही शिवसेना को हिंदुत्व के मुद्दे पर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी पार्टी बनाना चाहते हैं तो बीजेपी के पिछलग्गू क्यों बनेंगे? इतने पर भी राजनीति अनिश्चितता का खेल है जिसमें सिद्धांत पीछे छूट जाते हैं और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिए जाते हैं.