विपक्षी नेताओं में ममता सशक्त होकर उभरीं, मोदी को चुनौती देंगे क्षेत्रीय क्षत्रप

    बीजेपी के शीर्ष नेताओं के एड़ीचोटी का जोर लगाने के बावजूद बंगाल में टीएमसी का वर्चस्व कायम रहा और ममता ने हैटट्रिक बना ली. भले ही बीजेपी नेता कहें कि बंगाल में हमारी सीटें 3 से बढ़कर 86 हो गई लेकिन करारी पराजय का भाव उनके चेहरे पर अंकित हो गया है. 8 चरणों में चुनाव और बीजेपी के धुआंधार प्रचार तथा मोदी-शाह की इतनी रैलियां होने के बावजूद ममता ने अपने पैर की चोट से सहानुभूति बटोर ली. बंगाल पर कब्जा करने के बीजेपी के सपने चूर-चूर हो गए. मोदी के ‘दीदी ओ दीदी’ कहकर चुनौती देनेवाले भाषणों का विपरीत असर पड़ा. ममता ने जो ‘बाहरी’ वाला मुद्दा उठाया उसका जनता पर सीधा असर पड़ा. विपक्ष को धराशायी करने का मोदी-शाह का सपना धूल धूसरित होकर रह गया. बीजेपी की 76 सीटों के मुकाबले टीएमसी 215 सीटें हासिल कीं. नंदीग्राम में ममता ने शुभेंदू अधिकारी को बुरी तरह मात दीं.

    केवल असम में टिकी क्चछ्वक्क और पुडुचेरी हथियाया

    असम में बीजेपी पहले ही सत्तारूढ़ थी. इस चुनाव में उसका मुश्किल से 2 सीटों का इजाफा हुआ है. इसका भी श्रेय हिमंत बिस्व सरमा जैसे नेता को है जो कि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से ज्यादा प्रभाव रखते हैं. पुडुचेरी में बीजेपी नेतृत्व के एनडीए की जीत एक झुनझुने के समान है. इस केंद्र शासित प्रदेश की 30 सदस्यीय विधानसभा में सफलता मिलना बीजेपी के लिए गुड़ की जलेबी के समान हैं, इससे अधिक नहीं.

    ममता का कद बढ़ा

    ममता बनर्जी तब भी राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय थीं जब वे 10 वर्ष पूर्व लेफ्ट को मटियामेट कर बंगाल की सत्ता में आई थीं और अभी भी उन्होंने बीजेपी को पछाड़ कर अपनी मजबूती पुन: सिद्ध कर दी है. सारे एक्जिट पोल टीएमसी के लिए अधिकतम 156 तक सीट की भविष्यवाणी कर रहे थे लेकिन ममता उसे 215 सीट तक ले गई. बीजेपी ने टीएमसी के नेताओं को अपनी ओर फोड़ा लेकिन ममता की ताकत कम नहीं कर पाए. टीएमसी के वोट काटने के लिए ओवैसी-पीरजादा फैक्टर भी नहीं चल पाया. इस जीत के साथ विपक्ष में ममता एक बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं जो विपक्षी नेताओं के बीच मोदी को सीधी टक्कर देनेवाली कैंडिडेट के रूप में सामने आई हैं. उन्हें विपक्ष के विभिन्न नेताओं ने बधाई भी दी है.

    पवार ने अपनी राष्ट्रीय उपस्थिति रेखांकित की

    बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि शरद पवार के इस संदेश से टीएमसी को मदद मिली जिसमें उन्होंने विपक्षी पार्टियों से कहा था कि ममता की राह में आड़े न आओ. इस वजह से टीएमसी के वोट बिखर नहीं पाए. विजयवर्गीय का यह कथन दिखाता है कि बीजेपी को राजनीति के चतुर व अनुभवी खिलाड़ी पवार से खौफ है. पवार ने ट्िवटर पर ममता बनर्जी, एमके स्टालिन और पिनरई विजयन को बधाई देकर अपने नेशनल कनेक्ट या राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपस्थिति को रेखांकित किया है. इस तरह आगे चलकर क्षेत्रीय क्षत्रपों को एकजुट करने में पवार की प्रमुख भूमिका रह सकती है और उनका पॉवर बढ़ना तय है. हवा का रुख देकर नीतीश कुमार भी बीजेपी के खिलाफ आंखे तरेर सकते हैं यह बात अलग है कि अभी वे बिहार में बीजेपी के दबाव में सरकार चला रहे हैं. जहां तक क्षेत्रीय क्षत्रपों की बात है, नवीन पटनायक, मायावती और अखिलेश यादव भी उन्हीं में आते हैं.

    आंख तरेरनेवाले बढ़े

    बीजेपी व केंद्र के लिए यह भी बड़ा झटका है कि तमिलनाडु में एआईएडीएमके की पराजय हुई जो कि एनडीए में शामिल थी. डीएमके की एमके स्टालिन के नेतृत्व में जीत के बाद बीजेपी के सामने एक और आंख दिखानेवाला नेता सामने आ गया. बीजेपी ने पलानीस्वामी पर भरोसा किया था कि वे अपनी सरकार कायम रख पाएंगे परंतु तमिलनाडु की जनता अदल-बदल कर सरकार चुनती है. स्टालिन अपने पिता एम. करुणानिधि की विरासत को आगे बढ़ाएंगे और बीजेपी को चुनौती देनेवाले महत्वपूर्ण क्षत्रप साबित होंगे.