Mahatma Phule Krishi Vidyapeeth

    अहमदनगर. विभिन्न कंपनियां (Various Companies) और स्टार्टअप (Startup) उद्योग के सहयोग से नई तकनीक विकसित करना (Develop New Technology) और उसी के साथ डाटा एनालिटिक्स,डाटा स्टोरेज की सुविधा निर्माण करना चाहिए। खेती के लिए ड्रोन तकनीक (Drone Technology) का विकास करने का केंद्र सरकार का मकसद है। ऐसा प्रतिपादन भारत सरकार के नागरी उड्डयन मंत्रालय के सहसचिव अंबर दुबे ने किया।

    राहुरी के महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ के कास्ट-कासम प्रकल्प के तहत ड्रोन के बुनियादी तत्व विषय पर आयोजित राष्ट्रीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के समापन समारोह में अंबर दुबे बोल रहे थे। कुलगुरू डॉ.पी.जी. पाटिल की अध्यक्षता में आनलाइन तरीके आयोजित इस समारोह के लिए सहयोगी अधिष्ठाता डॉ.दिलीप पवार, निमंत्रक डॉ. सुनील गोरंटीवार, कार्यक्रम संचालक डॉ. सचिन नलावडे आदि उपस्थित थे। अंबर दुबे ने कहा कि भारत में ड्रोन तकनीक संचालनालय के लिए परिसंस्था विकसित करने की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।

    डीजीसीए करेगा सभी सहयोग

    उसी तरह महात्मा फुले कृषि विवि में संशोधन विकास और प्रशिक्षण सुविधा स्थापित कराने के लिए डीजीसीए की ओर से सभी प्रकार का सहयोग देने का आश्वासन दिया। कुलगुरू डॉ. पाटिल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल के लिए अत्याधुनिक संशोधन विकास प्रयोगशाला अधिक कार्यक्षम करना, ड्रोन चालकों के लिए प्रशिक्षण संस्था शुरू कराने के लिए शासन स्तर पर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उसी तरह इन्क्यूबेशन सेंटर की मदद से ड्रोन तकनीक किसानों तक पहुंचाने के लिए नवीन स्टार्टअप को मदद कर उन्हें पूरी तरह सक्षम किया जाएगा। डॉ. दिलीप पवार ने स्वागत किया। डॉ. सुनील गोरंटीवार ने उपक्रम की जानकारी दी। डॉ. सचिन नलावडे ने पाठ्क्रम की समीक्षा पेश की। इस उपक्रम के लिए इंजीनियर योगेश दिघे, डॉ. गिरीश कुमार भणगे, श्रद्धा वराले ने समन्वयक के रूप में काम किया।