शालाओं के साथ साथ अब महाविद्यालय भी शुरू करें, ऑनलाइन पद्धति से हो नहीं पा रही पढ़ाई

    • विद्यार्थियों की पढ़ाई का हो रहा है नुकसान 

    अकोला. कोरोना वायरस की दूसरी लहर की समाप्ति को देखते हुए सरकार ने 15 जुलाई से आठवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों की शालाएं शुरू करने का निर्णय लिया है. इसी श्रृंखला में अब महाविद्यालय भी शुरू किए जाने चाहिए. यह मांग प्राध्यापकों के साथ साथ विद्यार्थियों द्वारा की जा रही है. क्योंकि काफी लंबे समय से लाकडाउन के कारण महाविद्यालय बंद हैं.

    इस बारे में बातचीत करने पर महाविद्यालयों के प्राचार्यों का भी यही कहना है कि अब जब कोरोना नियंत्रण में है तो इसका लाभ शिक्षा क्षेत्र ने उठाना चाहिए और महाविद्यालय शुरू करने चाहिए. फिलहाल महाविद्यालयीन विद्यार्थियों की सभी परीक्षाएं ऑनलाइन हो रही हैं. सभी विद्यार्थी ऑनलाइन परीक्षाएं दे रहे हैं. अनेक महाविद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई भी शुरू है. फिर भी ऐसा लगता है कि ऑनलाइन पढ़ाई और ऑनलाइन परीक्षा का लाभ सभी विद्यार्थी नहीं उठा पाते हैं.

    पिछले करीब डेढ़ वर्ष से महाविद्यालय बंद होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई का काफी नुकसान हो रहा है ऐसा लगता है. अब सभी लोग चाहते हैं कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकार द्वारा दी गई सभी सूचनाओं का पालन करते हुए महाविद्यालय शुरू करने चाहिए जिससे विद्यार्थी अपनी क्लास में बैठ कर ठीक तरह से पढ़ाई कर सकें.

    ऑनलाइन पद्धति से पढ़ाने का संतोष नहीं मिलता-डा.आर.डी. सीकची

    कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए फिलहाल महाविद्यालय बंद हैं. इसलिए सभी परीक्षाएं ऑनलाइन शुरू हैं. लेकिन फिर भी ऑनलाइन पद्धति से पढ़ाने में पढ़ाने का संतोष नहीं मिलता है, यह विचार बातचीत के दौरान सीताबाई कला, वाणिज्य तथा विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डा.आर.डी. सीकची ने प्रकट किए.

    बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पद्धति द्वारा पढ़ाने में हम सभी विद्यार्थियों तक पहुंच सकते हैं ऐसा नहीं लगता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सच में विद्यार्थियों की पढ़ाई का काफी नुकसान हो रहा है. कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकार द्वारा दी गई सभी सूचनाओं का पालन करते हुए सरकार के आदेश के बाद हम महाविद्यालय में पढ़ाई शुरू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. 

    विद्याथियों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है-डा.एस.जी. चापके

    स्थानीय एलआरटी कॉमर्स कालेज के प्राचार्य डा.एस.जी. चापके से बात करने पर उन्होंने कहा कि महाविद्यालय बंद होने से सच में विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि जब तक कोरोना नियंत्रण में हैं तब तक इसका लाभ शिक्षा विभाग ने उठाना चाहिए और कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकार द्वारा दी गई.

    सूचनाओं का पालन करते हुए महाविद्यालय शुरू करने चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन करते हुए महाविद्यालय शुरू करने में कोई हर्ज नहीं है. हमारी आनेवाली पीढ़ी के भविष्य के लिए महाविद्यालयीन पढ़ाई बहुत जरूरी है. महाविद्यालय में आने के बाद विद्यार्थी महाविद्यालय में स्थित लाइब्रेरी का लाभ भी उठा सकते हैं. इसलिए महाविद्यालय शुरू करने चाहिए.