Old City Vegetable Market Transferred

  • अनलॉक में भी झेल रहे लाकडाउन की मार

अमरावती. कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर, शाला, जिम समेत साप्ताहिक बाजार बंद है. लगातार 6 माह से साप्ताहिक बाजार के साथ जत्रा-यात्रा बंद रहने से छोटे व्यापारियों पर भूखमरी की नौबत आन पडी है. इतना ही नहीं तो साप्ताहिक बाजार के भरोसे परिवार चलाने वालों की भी साप्ताहिक आय बंद हो चुकी है. वहीं दूसरी ओर लगातार बारिश के कारण सब्जियों के दाम आसमान छून लगे है. देश अनलॉक होने के बावजूद भी छोटे व्यापारियों को लॉकडाउन की मार का सामना करने पर विवश होना पड रहा है. 

एक से दूसरे गांव में लगाते थे दूकान

देश भले ही चांद पर पहुंच गया हो, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही. आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में साप्ताहिक बाजार भरे जाते है. ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस बाजार से सप्ताह भर के लिए राशन पानी भर लेते है. जिसमें सब्जियां, चने फूटाने के साथ कपडे और जरुरतों की वस्तुओं समेत बच्चों के लिए खिलौने भी सजाये जाते थे. तहसीलों के गांवों में कभी इस गांव में तो कभी उस गांव के बाजार में दूकान सजाते थे. मार्च माह में कोरोना संक्रमण पर लगाम कसने शासन प्रशासनस ने लाकडाउन घोषित किया. भीड न हो इसलिए स्कूल, कालेज, मंदिर के साथ जहां जहां भीड होती है वैसे स्थल जिसमें साप्ताहिक बाजार भी शामिल हो गया. अब शर्तों के आधार पर ही लेकिन पूरा देश अनलाक हो चुका है. लेकिन साप्ताहिक बाजार शुरु होने नहीं है जिसके भरोसे परिवार गुजर बरस होता है वह व्यवसाय ही बंद होने से परिवार पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है. 

सब्जी विक्रेता भी संकट में 

ग्रामीण क्षेत्रों में सब्जी विक्रेता भी इस साप्ताहिक बाजार के भरोसे आर्थिक आमदनी कमाते थे. पहले लाकडाउन और अब अनलाक के बावजूद लगातार हो रही बारिश के कारण सब्जी विक्रेताओं पर भी संकट मंडराने लगा है. पहले तो साप्ताहिक बाजार बंद है जैसे तैसे मोटारसाइकिल, तिपहिया हाथगाडी पर सब्जी का व्यवसाय करते थे लेकिन लगातार हो रही बारिश से सब्जियों का ऐसा नुकसान हो रहा है कि सब्जियों के दाम दुगने हो रहे है. ग्रामीण क्षेत्रों के फसलें पहले ही चौपट होने से किसान आर्थिक संकट में है ऐसे में सब्जी के बढे हुए दाम सब्जी विक्रेताओं को संकट में डाल रहे है. 

नागरिक भटक रहे दर-ब-दर

ग्रामीण क्षेत्रों में एक सप्ताह में काम करने के बाद महत्व पूर्ण दिन रहता है. जिस गांव में उस दिन साप्ताहिक बाजार होता है उसी दिन उसे एक सप्ताह में किये गये काम का मुआवजा मिलता है. इसलिए ग्रामीण क्षेत्र के लोग मुआवजा मिलते है अपनी जरुरतों की वस्तुओं को लेने साप्ताहिक बाजार में जाते है. जहां किराणा, सब्जी, चप्पल, जूते, कपडे, खिलौने से लेकर घर और महिलाओं के लिए भी साज्ज सज्जा का साहित्य रहता है. लेकिन 6 माह में प्रशासकीय नियमों के चलते साप्ताहिक बाजार बंद रहने से नागरिकों को दो माह से साप्ताहिक बाजार देखने दर ब दर भटकना पड रहा है.