पालांदूर ग्रामपंचायत में भी पार्टी बदलने पर प्रतिबंध!

  • .महाविकास आघाडी सरकार कर रही विचार 
  • .गट के अनुसार सीधे पार्टी का चिन्ह दिए जाने के आसार

पालांदूर (सं). राजनीति की शुरुआत ग्रामपंचायत स्तर से होती है. कोई भी नेता यह ज्यादातर ग्रामपंचायत चुनाव से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरु करते हैं. गांव की सत्ता में उसके दबदबे का चित्र ग्रामस्तर पर दिखता है. लोकसभा, विधानसभा की तरह ही ग्रामपंचायत में भी पार्टी बदलने का कानून लागु करने पर  महाविकास आघाडी सरकार विचार कर रही है.  बताया जा रहा है कि शिवसेना- राष्ट्रवादी काँग्रेस – कांग्रेस  इन तीनों ने इस प्रस्ताव पर सहमति जतायी है.  यह प्रस्ताव राज्य के विधि तथा न्याय विभाग पर भेजा गया है.ग्रामपंचायत के चुनाव राजनीतिक दलों के चिन्ह पर न लड़कर पैनल पर लड़ी जा रही है,  लेकिन अब ग्राम पंचायत के चुनाव पार्टी के चिन्ह पर लड़ने का विचार किया जा रहा है.   गांव स्तर की ग्रामपंचायत के चुनाव में जोड़तोड़ की राजनीति के कारण गांव का विकास नहीं हो पाया. 

राज्य की पूर्ववर्ती देवेंद्र फडणवीस सरकार के शासन काल में महायुति सरकार ने सीधे सरपंच के चुनाव का पर्याय चुना था। उसी आधार पर ढाई वर्षे अविश्वास प्रस्ताव सरपंच पर नहीं लाया जा सकेगा, ऐसी सीधी शर्त रखकर गांव के विकास को गति मिली थी, लेकिन फडणवीस सरकार के गिरते ही महाविकास आघाडी सरकार ने इस निर्णय को कचरे के डब्बे में डालकर सदस्यों में से सरपंच के चुनाव को सहमति दी है. सरपंच परिषद के इस निर्णय का विरोध कर सरपंच का चयन होना चाहिए, ऐसा आग्रह उनका आज भी कायम  है.

पैनल बंदी हो तो चलेगा, लेकिन विभिन्न राजनीतिक दलों के चिन्ह पर ग्राम पंचायत चुनाव न लड़ा जाए और अगर ऐसा हुआ तो गांव की राजनीति में टकराव पैदा होगा और गांव में कई गट तैयार हो जाएंगे.

धनंजय घाटबांधे (उप सरपंच ग्रा. पं. किटाली तथा भाजपा तालुकाध्यक्ष (लाखनी)

जिला परिषद, पंचायत समिति जैसे चुनाव पार्टी के चिन्ह पर होते हैं और बहुमता से जि. प. अध्यक्ष तथा पं. स. सभापति का चयन सदस्यों में से बहुमत होने पर उसी तर्ज पर ग्रा. पं में भीबहुमत से सरपंच तथा उपसरपंच की चयन प्रक्रिया अपनायी जाए

(रामकृष्ण कापसे, पूर्व कांग्रेस तालुकाध्यक्ष लाखनी तथा संचालक लाखनी तालुका खरेदी बिक्री संघ)

ग्रामपंचायत चुनाव पार्टी के चिन्ह पर हो. वर्तमान में यह चुनाव में पैनल पर लढ़े जाते हैं इस वजह एक तो पंचायत समिति के आधार पर अगर गट किया तभी उस पार्टी के चिन्ह पर चुनाव कराए जा सकेंगे.

( पंकज (धम्मा) रामटेके, सरपंच ग्रा. पं. पालांदूर)