Ambai Nimbai Mata and Chandika Mata Pavani

भंडारा. शहर के स्टैट बैंक समीप स्थित अंबाई-निंबाई माता का जागृत मंदिर भक्तों का श्रद्धास्थान है. मूल मंदिर हेमाडपंथी शैली में निर्मित है. अंग्रेजों के इम्पिरियल गजेटियर में भी मंदिर का जिक्र मिलता है. जिसमें मंदिर निर्माण गोंडकालीन बताया गया है. पूरे शहर की इस मंदिर में आस्था है. नवरात्रि में मंदिर में पूजन की परम्परा लगभग हर परिवार द्वारा निभाई जाती है. इस बार कोरोना की वजह से किसी भी भक्त को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है. मंदिर गेट बंद है. भाविकों को सड़क पर मां की कोसी भरने की परंपरा को निभाना पड़ रहा है.

प्राचीन है मंदिर

मंदिर में दो देवी प्रतिमा है. जिन्हें अंबाई निंबाई के नाम से पूजा जाता है. मंदिर के संबंध में कहानी प्रचलित है. जिसके अनुसार पूर्व में इस स्थान पर एक आम व नीम का पेड़ था. तेज आंधी में दोनों ही पेड़ गिर गए व दो देवी प्रतिमाएं प्रगट हुई. इसी घटना की वजह से इन देवी प्रतिमाओं को अंबाई निंबाई के नाम से पूजा जाने लगा. इस कहानी के आधार पर अनुमान निकाला जा सकता है कि देवी प्रतिमाएं सदियों पुरानी हो सकती है. पिछले कुछ वर्ष में परिसर में सभागृह बनाया गया. मंदिर परिसर में किए गए नव निर्माण में सभागृह व ज्योति कशल गृह का समावेश है. इस नवनिर्माण की वजह से  हेमाडपंथी शैली में निर्मित मंदिर पूरी तरह ढक चुका है. बाहर से मंदिर व देवी प्रतिमाओं की प्राचीनत्व का अंदाजा नहीं आता.

मंदिर को बेहद खूबसूरती से सजाया गया है. नवरात्रि में देवी प्रतिमाओं का विशेष शृंगार किया जाता है. विशेष महत्व होने की वजह से मंदिर में हजारों की संख्या में दर्शनार्थी आते रहे है. कोरोना में पाबंदियों की वजह से किसी भी भाविक को गर्भ गृह तक प्रवेश नहीं दिया जा रहा है. मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार बंद है. भाविकों के लिए सूचना लिखी गयी है.

सड़क से ही पूजा

कारोना की वजह से सरकार द्वारा देवी दर्शन पर पाबंदी लगायी गई है. मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार बंद है. गेट के भीतर टेबल पर देवी प्रतिमाओं का चित्र रखे गए है. भाविक सड़क से मां को प्रमाण करते हैं. देवी पूजा की परंपरा निभा रहे हैं. जिस मंदिर में पूरे दिन भीड़ रहती थी. वह मंदिर अब पूरी तरह से सूना है.