आज़ादी के 14 साल बाद मुक्त हुआ था गोवा, 450 वर्षों से था पुर्तगालियों के कब्ज़े में

गोवा भारत का बेहद ही खूबसूरत राज्य है। साथ ही दुनियाभर में बेहद प्रसिद्ध भी है। यहाँ लोग दूर-दूर से घूमने आते हैं। यह भारत का प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। यह राज्य अपने सुंदर समुद्री तट, खूबसूरत चर्च और यहाँ की पार्टीज़ के लिए मशहूर है। लेकिन क्या आप जानते हैं गोवा स्वतंत्र भारत का हिस्सा नहीं हुआ करता था? देश की आज़ादी के 14 साल बाद गोवा आज़ाद हुआ था। 

आज ही के दिन (19 दिसंबर) गोवा वर्ष 1961 में आज़ाद हुआ था। तभी से इस दिन को गोवा मुक्ति दिवस (Goa Liberation Day) के रूप में मनाया जाता है। वैसे गोवा का स्थापना दिवस 30 मई को मनाया जाता है, क्योंकि 30 मई, 1987 को गोवा को भारत का पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। तो आइए जानते हैं इस दिन का इतिहास… 

गोवा मुक्ति दिवस का इतिहास-
गोवा को पुर्तगालियों ने अपने कब्ज़े में कर रखा था। इन्हीं से मुक्त होने का जश्न गोवा हर साल आज के दिन मनाता है। गोवा भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित एक राज्य है, जिसे कोंकण के नाम से भी जाना जाता है। पुर्तगालियों के कब्ज़े से मुक्त होने के बाद, यह 1962 में भारत का हिस्सा बन गया और 1987 में आधिकारिक रूप से इसे भारत का एक राज्य बनाया गया। 

भारत को जब 15 अगस्त 1947 में आज़ादी मिली तब गोवा गोवा 450 वर्षों के पुर्तगाली शासन के कब्ज़े में हुआ करता था। पुर्तगाली पहले भारत के कुछ हिस्सों का उपनिवेश बनाने वाले थे और उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के मद्देनजर गोवा और अन्य भारतीय क्षेत्रों पर अपनी पकड़ बनाने से इनकार कर दिया। जिसके बाद भारत के पूर्व प्रधान मंत्री, जवाहरलाल नेहरू ने फैसला किया कि सैन्य हस्तक्षेप ही गोवा को मुक्त करने का एक एकमात्र हल था। 

18 दिसंबर, 1961 से आयोजित 36-घंटे के सैन्य अभियान का नाम ‘ऑपरेशन विजय’ था। इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना, वायु सेना, और सेना शामिल थे। जिसके बाद जनरल मैनुअल एंटोनियो वासालो ई सिल्वा ने आत्मसमर्पण के प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर किए और गोवा को भारत ने 19 दिसंबर 1961 को इनके कब्ज़े से आज़ाद करवाया। 

गोवा मुक्ति का जश्न-
गोवा मुक्ति दिवस का जश्न गोवा में देखने योग्य होता है। इस राज्य के लिए यह किसी उत्सव से कम नहीं होता है। इस राज्य में तीन अलग-अलग स्थानों से एक मशाल जुलूस निकाला जाता है, जो सभी आज़ाद मैदान में मिलते हैं। इस जगह पर उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है, जिन्होंने गोवा के अधिग्रहण में अपनी जान गंवा दी थी। साथ ही इस दिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे सुगम संगीत- कन्नड़ भाषा में कविता आदि जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। 

गोवा के नाम का इतिहास-
गोवा का उल्लेख महाभारत में मिलता है। इसे गोपराष्ट्र यानी गाय चराने वालों के देश में जाना जाता था। दक्षिण कोंकण क्षेत्र का उल्लेख गोवा राष्ट्र के रूप में पाया जाता है। संस्कृत के कुछ कई पुराने स्रोतों में गोवा को गोपकपुरी और गोपकपट्टन भी कहा गया है, जिसका उल्लेख हरिवंशम और स्कंद पुराण में मिलता। गोवा को पहले बहुत नाम से जाना जाता था जैसे गोअंचल, गोवे, गोवापुरी, गोपकापाटन और गोमंत आदि। इसके अलावा अरब के मध्ययुगीन यात्रियों ने गोवा को चंद्रपुर और चंदौर के नाम भी जानते थे।