अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस: जानें भारत में कब हुआ चाय का आगमन

आज यानी 15 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस (International Tea Day) मनाया जाता है। यह दिन चाय प्रेमियों के लिए बहुत खास है। वैसे भी हमारे देश में चाय प्रेमियों की कोई कमी नहीं है। जिनके दिन की शुरुआत भी चाय से होती है और रात में सोने से पहले भी चाय पीना पसंद करते हैं। कुछ लोग तो इसके इतने दीवाने होते हैं कि दिन में 8-10 कप चाय आसानी से पी लेते हैं। इसके अलावा ऐसे भी कई लोग हैं जो अलग-अलग जगह की चाय पीने का शौक रखते हैं। इसके लिए वह दूर-दूर तक ट्रेवल करते हैं। 

अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस की शुरूआत-
वर्ष 2004 में भारत के मुंबई शहर में व्यापार संघों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की बैठक में 15 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाने का फैसला लिया गया था। वहीं पहली बार इस दिन को 15 दिसंबर 2005 को मनाया गया था। दुनिया में चीन, भारत, केन्या, वियतनाम और श्रीलंका प्रमुख रूप से चाय के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा यह दिन मलावी, तंजानिया, बांग्लादेश, यूगांडा, इंडोनेशिया और मलेशिया में भी मनाया जाता है।

उद्देश्य-
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाने के पीछे का उद्देश्य यह है कि दुनियाभर में चाय के व्यापार पर और चाय बाग़ानों में श्रमिकों और उत्पादकों पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर सके। साथ ही लोगों को यह भी बताया जा सके कि चाय से क्या फायदे हो सकते हैं और क्या नुकसान हो सकते हैं।

चीन में हुई थी पहली चाय की खेती-
चाय को लोग बहुत अलग-अलग तरीके से बनाते हैं। कोई इसमें अदरक डालता है तो कोई इलायची। यह दुनिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वाला पेय पदार्थ है। यह एक ऐसा ड्रिंक है जो कैमेलिया सिनेंसिस के पत्तों से बनता है, जो एशियाई महाद्वीप के लिए एक झाड़ी है। इसकी खेती पहली बार चीन में की गई थी, इसे लेकर एक कहानी बहुत प्रचलित है कि एक बार सम्राट शेनॉन्ग अपने बगीचे में बैठे हुए गर्म पानी पी रहे थे। उसी दौरान एक पेड़ की पत्ती उनके उबलते हुए पानी के कप में गिर गई जिसकी वजह से पानी का रंग बदल गया और शानदार महक भी आने लगी। फिर जब इस पानी को सम्राट ने पिया तो उन्हें उसका स्वाद बेहद पसंद आया और इस प्रकार चाय का अविष्कार हुआ।

भारत में कब आई चाय-
भारत में चाय के आगमन को लेकर कहा जाता है कि साल 1824 में बर्मा या म्यांमार और असम की सीमांत पहाड़ियों पर चाय के पौधे पाए गए थे। जिसके बाद अंग्रेजों ने वर्ष 1836 मे भारत में चाय का उत्पादन शुरू किया था। इसकी खेती के लिए पहले चीन से बीज मंगवाए जाते थे, लेकिन बाद में असम में चाय के बीजों का इस्तेमाल किया जाने लगा। भारत में चाय का उत्पादन ब्रिटेन के बाज़ारों में चाय की डिमांड को पूरा करने के लिए किया गया था। 

चाय का हेल्थ पर असर-
चाय स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। दुनिया भर में किए गए कई रिसर्च इस बात को सही भी साबित कर चुके हैं। पोषक रूप से चाय में प्रोटीन, पॉलीसेकेराइड, पॉलीफेनोल, खनिज और ट्रेस तत्व, अमीनो और कार्बनिक एसिड, लिग्निन, और मिथाइलक्सैन्थिन पाए जाते हैं। वहीं चाय के स्वास्थ्य लाभ फाइटोकेमिकल्स से आते हैं जो हमारे शरीर में शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट के रूप में काम करते हैं। लेकिन अगर इसका ज़्यादा सेवन करना भी हानिकारक हो सकता है।