नेता और जनप्रतिनिधि में फ़र्क देखिए

लखीसराय (Lakhisarai) के लिए मुंगेर से लोकसभा सांसद राजीव रंजन सिंह ललन (Rajiv Ranjan Singh)  कितने जरूरी हैं इस बात का अंदाजा आपको रविवार को एक हृदय विदारक घटना से लग जायगा. 

कोरिया गांव (Koriya Village) में एक बुजुर्ग की मौत हो गई। बुजुर्ग के चार बेटों में से तीन की मौत पहले ही हो गई थी और एक बेटा फिलहाल लखीसराय जेल में बंद था, जिसे जेल की चारदीवारी टूटने के बाद भागलपुर (Bhagalpur) जेल शिफ्ट कर दिया गया। बड़ा सवाल उस बुजुर्ग की मौत के बाद यह था कि आखिर अब उस बुजुर्ग को मुखाग्नि देगा कौन…?

बुजुर्ग को मुखाग्नि (Last Rites) देने के लिए जेल में बंद बेटे को पैरोल पर बाहर निकलना था। लेकिन दिन रविवार का था और परोल के लिए आवेदन भी कहां किया जाए इस बात की जानकारी उस परिवार के सदस्यों को नहीं थी. एक नाबालिग युवक लखीसराय जिला समाहरणालय में हाथ में आवेदन लिए दफ्तर दफ्तर घूम रहा था। लेकिन हर दफ्तर पर ताला जड़ा था. 

किसी तरह से वह नाबालिग युवक लखीसराय जिलाधिकारी (Lakhisarai District Collector) के गोपनीय तक आवेदन पहुंचाने में कामयाब हो गया। लेकिन सवाल था कि आंगन में लाश पड़ी है अगर आवेदन सरकारी रफ्तार से बढ़ेगी तो लाश सड़ चुकी होगी जबतक मुखाग्नि देने वाला आयेगा।

वह बच्चा बेचैन था और उस बच्चे को मदद करने के लिए एक समाजसेवी लगे थे और वो भी परेशान थे। लेकिन रविवार का दिन और किसी तरह की मदद की उम्मीद दिख नहीं रही थी।

लखीसराय से बीजेपी के विधायक और विधान सभा के अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) लखीसराय शहर में ही थे। सर्किट हाउस में प्रशासनिक बैठक हो रही थी और वह हाथ में आवेदन लिए सर्किट हाउस गेट पर खड़ा था।

विजय कुमार सिन्हा से आग्रह किया गया कि मानवता (Humanity) के आधार पर इस बात को गंभीरता से लिया जाय और डीएम को कहा जाय। खैर, उनके मातहतों ने जिलाधिकारी को फोन किया। जिलाधिकारी 2 घंटे के बाद उस आवेदन पर रियक्ट तो किये। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात। इस बीच इस 

बात की जानकारी किसी तरह से  मुंगेर के सांसद (Munger MP Ranjan Singh Lalan) रंजन सिंह ललन को दूरभाष पर मिल गई।

राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ सांसद, जेडीयू

उन्होंने अगले 15 मिनट में भागलपुर के डीएम को फोन किया और जो पीड़ित परिवार था। जो वह नवयुवक था. जो उसके समर्थन में लोग थे। उनको इस बात की सूचना दी गई की परोल पर मृतक बुजुर्ग के बेटे को छोड़ा जा रहा और मुखाग्नि की सनातन परंपरा में उसको शामिल होने की व्यवस्था कर दी गयी है।

यह फर्क होता है जनप्रतिनिधि में और राजीव रंजन सिंह ललन जैसे जनप्रतिनिधि में।

साभार: (पुरुषोत्तम सिंह के फ़ेसबुक वॉल से)