स्टार प्रचारक नहीं बनाया कांग्रेस ने असंतुष्ट नेताओं को नजरअंदाज किया

    सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को पत्र लिखकर मीडिया में प्रकाशित करवानेवाले कांग्रेस के जी-23 (G-23) नेताओं को पार्टी ने करारा झटका दिया है. 4 राज्यों व 1 केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं लेकिन इन नेताओं की कोई पूछपरख नहीं है. उनमें से किसी को भी स्टार प्रचारक के रूप में नहीं भेजा जा रहा है. यह कांग्रेस हाईकमान (Congress Leaders) का स्पष्ट संकेत है इन नेताओं की चुनाव में कोई जरूरत नहीं है और इनके बगैर भी पार्टी का काम चलता है. इन पुराने और अनुभवी नेताओं ने कभी सोचा भी न होगा कि उनकी इस तरह से उपेक्षा की जाएगी. उनकी वरिष्ठता की अब कोई कद्र नहीं है.

    उन्हें चुनाव के इस महत्वपूर्ण मौके पर कोई जिम्मेदारी नहीं देना काफी अपमानजनक है. उनका असंतुष्ट होना उनकी योग्यता पर भारी पड़ गया. इन नेताओं ने पत्र भेजकर पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र तथा चुनाव कराने की मांग की थी. 2 वर्ष पहले राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था तब से यह पद खाली पड़ा है. सोनिया गांधी पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं. इस तरह की कामचलाऊ स्थिति से उबरने के लिए इन नेताओं ने पत्र लिखा था. इसे पार्टी नेतृत्व को चुनौती के रूप में लिया गया. मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहा.

    गुलाम नबी आजाद जब अपना 6 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर राज्यसभा से रिटायर हुए तो प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी तरीफ में लंबा विदाई भाषण दिया जिसे राजनीतिक क्षेत्रों में इस रूप में लिया गया कि बीजेपी जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में आजाद को सीएम पद का उम्मीदवार बना सकती है जो फारूक और महबूबा मुफ्ती को टक्कर देंगे. ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में जाने के बाद से कांग्रेस नेतृत्व चौकन्ना हो गया है. बंगाल और असम जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के लिए कांग्रेस ने स्टार (1st Phase Of Bengal Polls) प्रचारकों की जो सूची जारी की उसमें गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, कपिल सिब्बल और भूपिंदर सिंह हुड्डा जैसे नेताओं के नाम नदारद हैं. कांग्रेस के पहले चरण के स्टार प्रचारकों में सोनिया, राहुल व प्रियंका के अलावा नवजोतसिंह सिद्धू और मोहम्मद अजहरुद्दीन का समावेश है. कांग्रेस नेतृत्व जी-23 नेताओं की मनुहार करने को तैयार नहीं है.