9 तहसीलों में नहीं मिले कोरोना मरीज, अब बचे केवल 166 सक्रिय मरीज

    गड़चिरोली. एक तरफ राज्य सरकार ने कोरोना की तीसरे लहर की संभावना जताते हुए सोमवार से संपूर्ण राज्य में विभिन्न पाबंदियां लगाई हैं. जिलाधीश ने भी आदेश जारी कर सोमवार से संपूर्ण जिले में शाम 4 बजे ही व्यापार शुरू रखने की अनुमति दी है. ऐसे में सोमवार को गड़चिरोली जिले की 8 तहसीलों में एक भी कोरोना का मरीज नहीं मिला है.

    जिनमें अहेरी, आरमोरी, भामरागड़, धानोरा, कोरची, कुरखेड़ा, मुलचेरा, सिरोंचा और देसाईगंज तहसील का समावेश है. विशेषत: सोमवार को जिले में केवल 8 नये बाधित मरीज मिले हैं. जिससे गड़चिरोली जिला धीरे-धीरे कोरोना मुक्ति की ओर बढ़ते दिखाई दे रहा है.

    अब  बचे 166 सक्रिय मरीज

    पिछले 20 दिनों से राज्य के आखरी छोर पर बसे गड़चिरोली जिले में कोरोना के मरीज कम होने का सिलसिला जारी है. वर्तमान स्थिति में जिले में केवल 166 कोरोना के सक्रिय मरीज शेष है. बता दें कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उचित नियोजन और जनजागृति के चलते जिले में बड़ी तेजी से कोरोना का मरीज कम हो रहे हैं.

    वहीं बाधितों की तुलना में कोरोनामुक्त होनेवालों की संख्या अधिक बढ़ रही है. इधर जिला प्रशासन द्वारा जिले को पूरी तरह कोरोनामुक्त करने के लिये जिले के नागरिकों को सहयोग करने की अपिल की जा रही है.

    सोमवार को 16 कोरोनामुक्त, मृत्यु नहीं

    सोमवार को गड़चिरोली जिले में 16 मरीज कोरोनामुक्त होकर 8 नये बाधित मिले हैं. नये बाधितों में गड़चिरोली तहसील में 4, आरमोरी 2 और चामोर्शी तहसील के 2 बाधितों का समावेश है. वहीं कोरोनामुक्त हुए मरीजों में गड़चिरोली तहसील में 10, चामोर्शी 1, मुलचेरा 1, सिरोंंचा 2, कुरखेड़ा 1 और देसाईगंज तहसील के 1 मरीज का समावेश है.

    जिले में अब तक कोरोना के चलते 740 मरीजों की मृत्यु हुई है. जिले में कोरोना मरीज स्वस्थ्य होने की फीसदी 97 प्रश है. वहीं सक्रिय मरीजों की फीसदी 55 फीसदी होकर जिले में मृत्यु दर 2.45 फीसदी है.

    वैक्सीन को लेकर स्थानीय भाषा में जनजागृति

    शहरी क्षेत्र में विभिन्न भाषाएं बोलने वाले लोग रहते हैं जिससे अधिकारी व कर्मचारी बड़ी आसानी से कोरोना टीकाकरण संदर्भ में इस क्षेत्र के लोगों में जनजागृति कर पा रहे हैं. लेकिन दुर्गम क्षेत्र में अधिकतर नागरिक आदिवासी समुदाय के होने के कारण उन्हें उनकी ही भाषा में जनजागृति कराने की पहल जिला प्रशासन द्वारा शुरू कर दी गई है.

    बता दें कि अधिकारी व कर्मचारी आदिवासी भाषा से अवगत नहीं हैं जिससे कारण स्थानीय व्यक्ति के जरिये और कर्मचारी जो आदिवासी भाषा जानते हैं, ऐसे लोगों की सहायता से आदिवासी नागरिकों में कोरोना टीकाकरण को लेकर जनजागृति की जा रही है. जिससे  दुर्गम क्षेत्र में भी टीकाकरण को लेकर नागरिकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है.