‘आचारसंहिता’ विकास कार्य में रोडा!

  • आचारंहिता का नियम रद्द करने की पूर्व विधायक मडावी की मांग

आरमोरी. सरकार स्तर से संबंधित विभाग द्वारा स्थानिय स्वराज्य संस्था समेत विधानसभा, लोकसभा, पदवीधर मतदाता संघ के अलावा आकस्मिक कालावधि में आचारसंहिता लगाई जाती है. मात्र यह आचारसंहिता सरकारी, गैरसरकारी कार्य समेत विकास कार्य में रूकावट आने का नागरिकों द्वारा कहा जा रहा है. आचारसंहिता का नियम रद्द करने की मांग पूर्व विधायक डा. रामकृष्ण मडावी ने की है. 

कोई भी चुनाव हुआ तो एक माह के पहले उस क्षेत्र में संबंधित विभाग द्वारा आचारसंहिता लागू की जाती है. इस आचारसंहिता से किसी भी विभाग की नोकरभर्ती, कर्मचारियों की पदोन्नती के अलावा छोटे-बडे सरकारी, गैरसरकारी कामकाज का भुमिपूजन, निर्माणकार्य पर निर्बंध आता है. 

आचारसंहिता से अनेक सुशिक्षित बेरोजगार नोकरी से वंचित रहकर सरकारी, गैरसरकारी अधिकारी, कर्मचारी वर्ग को उनके काम से सहुलियत उपलब्ध होती है. जिससे उनके कार्यालय की काम की गती कम होकर कामचोर अधिकारी निर्माण होते है. आचारसंहिता में जो अधिकारी नियमों का कडाई से पालन नहीं करने पर उस पर कडी कार्रवाई करन आवश्यक है. किंतु केवल आचारसंहिता के नाम पर बार बार चुनाव के दौरान सभी कामकाज पर बंदी लगाना यह गाव, शहर, जिले की जनता पर अन्याय करने जैसे होता है, ऐसा आरोप पूर्व विधायक डा. रामकृष्ण मडावी ने किया है.

निर्माणकार्य में अडचण

आचारसंहिता लगने के पूर्व गाव विकास के लिए अनेक सरकारी, गैरसरकारी, छोटे-बडे निर्माणकार्य मंजूर किए जाते है. तथा अनेक निर्माण का भूमिपूजन भी निर्धारित होता है. मात्र आचारसंहिता लगते ही, उक्त निर्माण व भूमिपूजन पर बंदी आती है. आचार संहिता के नियम व शर्तों के कारण निर्माण पूरा नहीं हो पाता. जिससे उस काम पर मंजूर हुआ निधी वापिस जाने के मार्ग पर होता है. जिससे गाव विकास के लिए सुविधा मिलने में रूकावट निर्माण होती है.

आचारसंहिता में विकास काम ठप

आचारसंहिता में शहर समेत ग्रामीण क्षेत्र के अनेक योजनाओं का लाभ, अनुदान भी नहीं दिया जा सकता है. कर्मचारियों के रिक्त पद, पदोन्नती नहीं की जाती है. जिससे आचारसंहिता केवल कर्मचारियों के हित का ही निर्णय होकर अनेक काम में बाधा निर्माण होती है. आचारसंहिता के कारण स्पर्धा परीक्षा, चयन जांच, निर्माण कार्य पर बंदी आने से कर्मचारियों को कार्यालय में काम कम रहने के कारण काम की तेजी कम हो जाती है. जिससे अनेक कार्यालय में कामचोर कर्मचारियों के फौज तैयार होती है. जिससे आचार संहिता का नियम तत्काल रद्द करे, ऐसी मांग पूर्व विधायक डा. रामकृष्ण मडावीने पत्रक से की है.